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जानिए धीरुभाई अंबानी का रिलायंस उद्योग उचाईयों तक पहुँचाने तक का सफर

धीरजलाल हीरालाल अंबानी जिन्हें धीरुभाई के नाम से जाना जाता है | धीरूभाई अंबानी का जन्म 28 दिसंबर 1933 को सौराष्ट्र के जूनागढ़ जिले में हुआ था। इनका पूरा नाम धीरजलाल हीराचंद अंबानी था। धीरूभाई ने जब बिज़नेस की दुनिया में कदम रखा तो न उनके पास पुश्तैनी संपत्ति थी और न ही बैंक बैलेंस। उनके पिता हीराचंद एक प्राइमरी स्कूल में अध्यापक थे। धीरूभाई के निधन के बाद उनकी संपत्ति बंटवारे में उनकी पत्नी कोकिलाबेन ने ही मुख्य भूमिका अदा की थी।

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जानिए चेचक के टीके के अविष्कारक एडवर्ड जेनर की कहानी

एडवर्ड जेनर एक प्रसिद्ध चिकित्सक थे। विश्व में उनका नाम इसलिए भी प्रसिद्ध है कि इन्होंने चेचक के टीके का आविष्कार किया था। एडवर्ड जेनर के इस आविष्कार से आज करोड़ों लोग चेचक जैसी घातक बीमारी से ठीक हो रहे हैं और अपने जीवन का आनन्द ले रहे हैं। 

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जाने सैंडफोर्ड फ्लेमिंग के बारे मे

सैंडफोर्ड फ्लेमिंग एक ब्रिटिश कनाडाई इंजीनियर और आविष्कारक थे। सैंडफोर्ड फ्लेमिंग का जन्म 7 जनवरी 1827 को स्कॉटलैंड में हुआ था | फ्लेमिंग को दुनियाभर में टाइम जोन्स का जनक माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि आयरलैंड में सफर के दौरान इनकी एक ट्रेन मिस हो गई थी।

 

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जानिए वैज्ञानिक सत्येन्द्रनाथ बोस के बारे में

सत्येन्द्रनाथ बोस का जन्म 1 जनवरी 1894  कोलकाता में हुआ था।सत्येन्द्रनाथ बोस की आरंभिक शिक्षा एक साधारण स्कूल में हुई थी,उसके बाद सत्येन्द्रनाथ बोस ने 'प्रेसिडेंसी कॉलेज' में प्रवेश लिया। सत्येंद्र नाथ बोस ने सन् 1913 में बी. एस. सी. और सन् 1915 में एम. एस. सी. प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण किया।

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जानिए वैज्ञानिक होमी जहाँगीर भाभा के बारे में

डॉ. होमी जहाँगीर भाभा का जन्म 30 अक्टूबर 1909 को मुंबई के एक पारसी परिवार में हुआ था।उनके पिता जहांगीर भाभा ने कैंब्रिज से शिक्षा प्राप्त की थी और एक जाने-माने वकील थे और माता भी उच्च घराने से थी ।बालक होमी के लिए पुस्तकालय की व्यवस्था घर पर ही कर दी गई थी जहाँ वे विज्ञान तथा अन्य विषयों से संबन्धित पुस्तकों का अध्ययन करते थे। 
 

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जानिए प्रतिष्ठित भौतिक-शास्त्री चन्द्रशेखर वेंकटरमन के बारे में

चन्द्रशेखर वेंकटरमन एक भारतीय भौतिक-शास्त्री थे। प्रकाश के प्रकीर्णन पर उत्कृष्ट कार्य के लिये वर्ष 1930 में उन्हें भौतिकी का प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार दिया गया। उनका आविष्कार उनके ही नाम पर रमन प्रभाव के नाम से जाना जाता है। 1954 में उन्हें भारत सरकार द्वारा भारत रत्न की उपाधि से विभूषित किया गया तथा 1957 में लेनिन शान्ति पुरस्कार प्रदान किया था।

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महाराणा प्रताप की गौरवगाथा

महाराणा प्रताप का नाम भारतीय इतिहास में वीरता और दृढ़ प्रतिज्ञा के लिए अमर है। वे उदयपुर, मेवाड़ में सिसोदिया राजवंश के राजा थे। वह तिथि धन्य है, जब मेवाड़ की शौर्य-भूमि पर "मेवाड़-मुकुट मणि" राणा प्रताप का जन्म हुआ। वे अकेले ऐसे वीर थे, जिसने मुग़ल बादशाह अकबर की अधीनता किसी भी प्रकार स्वीकार नहीं की। वे हिन्दू कुल के गौरव को सुरक्षित रखने में सदा तल्लीन रहे। महाराणा प्रताप की जयंती विक्रमी सम्वत् कॅलण्डर के अनुसार प्रतिवर्ष ज्येष्ठ, शुक्ल पक्ष तृतीया को मनाई जाती है।

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दारा शिकोह - मुग़ल साम्राज्य का एक और प्रतिनिधि

दारा शिकोह मुग़ल बादशाह शाहजहाँ और मुमताज़ महल का सबसे बड़ा पुत्र था। शाहजहाँ अपने इस पुत्र को बहुत अधिक चाहता था और इसे मुग़ल वंश का अगला बादशाह बनते हुए देखना चाहता था। शाहजहाँ भी दारा शिकोह को बहुत प्रिय था। वह अपने पिता को पूरा मान-सम्मान देता था और उसके प्रत्येक आदेश का पालन करता था। आरम्भ में दारा शिकोह पंजाब का सूबेदार बनाया गया, जिसका शासन वह राजधानी से अपने प्रतिनिधियों के ज़रिये चलाता था।

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जानिए छत्रपति शिवाजी महाराज की शौर्यगाथा

छत्रपति शिवाजी महाराज या शिवाजी राजे भोसले भारत के महान योद्धा एवं रणनीतिकार थे जिन्होंने 1674 में पश्चिम भारत में मराठा साम्राज्य की नींव रखी थी। उन्होंने कई वर्ष औरंगज़ेब के मुगल साम्राज्य से संघर्ष किया। सन 1674 में रायगढ़ में उनका राज्याभिषेक हुआ और छत्रपति बने। शिवाजी ने अपनी अनुशासित सेना एवं सुसंगठित प्रशासनिक इकाइयों की सहायता से एक योग्य एवं प्रगतिशील प्रशासन प्रदान किया। उन्होंने समर-विद्या में अनेक नवाचार किये तथा छापामार युद्ध की नयी शैली (शिवसूत्र) विकसित की। उन्होंने प्राचीन हिन्दू राजनैतिक प्रथाओं तथा दरबारी शिष्टाचारों को पुनर्जीवित किया और फारसी के स्थान पर मराठी एवं संस्कृत को राजकाज की भाषा बनाया।

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जाने शहंशाह अकबर की जीवन गाथा

बाबर की मृत्यु के दस साल के भीतर ही सन्‌ 1530 उनके पुत्र हुमायूँ के हाथ से गद्दी निकल गई । वह जान बचाने के लिये इधर-उधर मारा मारा फिर रहा था। इसी बीच सन्‌ 1541 में हमीदा बानो से हुमायूँ की शादी हुई और सन्‌ 1542 में अकबर का जन्म अमरकोट के राणा वीरसाल के महल में हुआ था। अकबर का जन्म पूर्णिमा के दिन हुआ था इसलिए उनका नाम बदरुद्दीन मोहम्मद अकबर रखा गया था। 

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