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सपा-कांग्रेस के बीच गठबंधन तय; आज हो सकती है घोषणा

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चुनाव आयोग के पार्टी का चुनाव चिन्ह साइकिल उन्हें आवंटित किये जाने से उत्साहित उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा को सत्ता में आने से रोकने के लिए कांग्रेस-रालोद से गठबंधन की रणनीति बना रहे अपने सलाहकारों से मंगलवार को विचार-विमर्श किया। तेजी से आगे बढे घटनाक्रमों के बीच अखिलेश ने पार्टी के संस्थापक एवं अपने पिता से उनके घर पर मुलाकात की तथा उनके साथ अपने संबंधों को अटूट करार दिया। दो दिन में यह पिता-पुत्र की दूसरी मुलाकात है।
 
अखिलेश के खेमे ने हालांकि, चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती दिए जाने की स्थिति के लिए खुद को तैयार रखते हुए एहतियात के तौर पर उच्चतम न्यायालय में कैविएट याचिका भी दायर कर दी। चुनाव आयोग के आदेश के बाद सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी का समूचा नियंत्रण अखिलेश के हाथों में आने के साथ आज कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर लखनऊ और दिल्ली दोनों में काफी गहमागहमी रही।
 
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लखनऊ में कहा कि गठबंधन पर फैसला एक या दो दिन में कर लिया जाएगा। वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने राष्ट्रीय राजधानी में कहा कि प्रस्तावित भागीदारी के महत्वपूर्ण पहलुओं पर अगले कुछ दिन में फैसला होगा। अखिलेश ने लखनऊ में पत्रकारों से कहा, गठबंधन (कांग्रेस के साथ) पर एक या दो दिन में फैसला होगा। उधर, सपा में घमासान के समय अखिलेश के साथ खड़े रहे उनके चाचा एवं पार्टी रणनीतिकार रामगोपाल यादव ने राज्य विधानसभा चुनाव के लिए एक धर्मनिरपेक्ष महागठबंधन की उम्मीद जताई।
 
राज्य में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया आज शुरू हो गई जब 11 फरवरी को होने वाले पहले दौर के मतदान के लिए अधिसूचना जारी की गई। कांग्रेस महासचिव गुलाम नबी आजाद ने नयी दिल्ली में संवाददाताओं से कहा, मुझे विश्वास है कि समाजवादी पार्टी-कांग्रेस गठबंधन उत्तर प्रदेश में अगली सरकार बनाएगा। उत्तर प्रदेश में पार्टी मामलों के प्रभारी आजाद ने कहा कि अभी यह गठबंधन प्रक्रिया की शुरूआत है और महत्वपूर्ण पहलुओं पर अगले एक-दो दिन में फैसला होगा।
 
बाद में, अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की ब्रीफिंग में उत्तर प्रदेश के लिए पार्टी के समन्वयक मीम अफजल ने भी इसी तरह की बात कही। उन्होंने कहा, गठबंधन का ब्योरा अगले दो दिन में घोषित किया जाएगा। सपा के दो खेमों के बीच विवाद का अखिलेश के पक्ष में समाधान होने से पहले मुलायम ने कांग्रेस के साथ गठबंधन की बातों को खारिज किया था, जबकि उनके मुख्यमंत्री पुत्र कह चुके थे कि यदि दोनों दल साथ मिलकर चुनाव लड़ते हैं तो गठबंधन 403 में से 300 से अधिक सीट जीत सकता है।
 
खबर है कि आज जब अखिलेश ने अपने पिता से मुलाकात की तो मुलायम ने उन्हें करीब 40 उम्मीदवारों की सूची सौंपी। अपुष्ट खबरों के मुताबिक सूची में मुलायम के छोटे भाई शिवपाल का नाम नहीं है जो पारिवारिक विवाद के केंद्र में थे। हालांकि खबर है कि सूची में उनके पुत्र का नाम है। अखिलेश ने कालिदास मार्ग स्थित अपने आवास पर एक अनौपचारिक बातचीत में कहा, दोनों सूचियों में 90 प्रतिशत से अधिक उम्मीदवारों के नाम समान हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी प्राथमिकता फिर से सपा की सरकार बनाने की है। उन्होंने हर किसी को साथ लेकर चलने का वायदा किया।
 
उन्होंने कहा, मैं नेताजी (मुलायम सिंह यादव) को साथ लेकर चलूंगा, उनके साथ मेरा संबंध अटूट है। मुझे विश्वास था कि साइकिल (चिह्न) मुझे मिलेगी। कम समय बचा है। यह एक बड़ी जिम्मेदारी है और मैं हर किसी को अपने साथ लेकर चलूंगा। सपा सूत्रों के मुताबिक पार्टी खुद 250 से अधिक सीटों पर लड़ेगी। कांग्रेस को सपा की ओर से 90 से 100 सीटों की पेशकश की जा रही है। अजित सिंह के राष्ट्रीय लोकदल को भी पाले में लाने की कोशिश की जा रही है जिसका पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रभाव है जहां पहले दो चरणों में 11 और 15 फरवरी को मतदान होगा। कहा जाता है कि रामगोपाल यादव और गुलाम नबी आजाद सीट बंटवारे पर मतभेदों को दूर करने के लिए बातचीत कर रहे हैं।
 
सपा सूत्रों ने कहा कि पार्टी उम्मीदवारों की सूची एक या दो दिन में जारी की जाएगी। ऐसी खबरें हैं कि तीनों दल साझा न्यूनतम कार्यक्रम ला सकते हैं। इस बीच, दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कहा कि यदि गठबंधन होता है तो वह अखिलेश के पक्ष में हट जायेंगी। शीला को कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार के रूप में पेश किया था।
 
अखिलेश के प्रमुख सलाहकार रामगोपाल यादव और नरेश अग्रवाल (दोनों राज्यसभा सदस्य) मंगलवार शाम लखनऊ पहुंचे और उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप देने के वास्ते चर्चा करने के लिए तत्काल अखिलेश से बात करने उनके घर गए। पार्टी सूत्रों ने कहा कि सूची कांग्रेस के साथ संभावित गठबंधन को ध्यान में रखकर तैयार की जाएगी क्योंकि नामांकन प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है।
 
अपने पुत्र के हाथों संभवत: सबसे मुश्किल राजनीतिक लड़ाई हार चुके मुलायम अपने बंगले में ही रहे जो अखिलेश के घर के पास ही है। उनके भाई शिवपाल और अंबिका चौधरी जैसे कुछ अन्य वफादारों ने दिन में उनसे मुलाकात की।
 


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