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यूपी विधानसभा चुनावों के मद्देजर राज्य में महागठबंधन को बड़ा झटका लगा है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर महागठबंधन बनाने की कवायद के बीच सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी (सपा) ने राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के साथ तालमेल ना करने का फैसला किया है। अजीत सिंह की अगुवाई वाली पार्टी राष्ट्रीय लोक दल के साथ अब समाजवादी पार्टी से गठबंधन नहीं होगा। अब सिर्फ समाजवादी पार्टी का कांग्रेस के साथ ही गठबंधन होगा। समाजवादी पार्टी के उपाध्यक्ष किरणमय नंदा ने इसे लेकर गुरुवार को जानकारी दी।
सपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरणमय नंदा ने गुरुवार को यहां बताया कि उनकी पार्टी अजित सिंह की अगुवाई वाले रालोद के साथ कोई गठबंधन नहीं करेगी। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने काफी विचार-मंथन के बाद यह फैसला किया है।
उन्होंने कहा कि सपा ने कांग्रेस के साथ तालमेल के लिये खुद बात की थी। कांग्रेस से कहा गया था कि वह रालोद से गठबंधन की बात करे। नंदा ने कहा कि उनकी पार्टी कांग्रेस के साथ तालमेल करके कुल 403 में से करीब 300 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। प्रत्याशियों की सूची के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि सपा ने चुनाव के पहले और दूसरे चरण के लिये अपने उम्मीदवारों के नाम तय कर लिये हैं। अब कांग्रेस को अपने प्रत्याशी तय करने हैं। सीटों के आंकड़े के बारे में विस्तार से पूछे जाने पर नन्दा ने कहा कि इस बारे में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ही तय करेंगे। पार्टी जल्द ही अपना घोषणापत्र भी जारी करेगी।
सूत्रों के अनुसार खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जनाधार रखने वाला रालोद गठबंधन के तहत ज्यादा सीटें मांग रहा था, मगर सपा इसके लिये तैयार नहीं थी। रालोद के वरिष्ठ नेता अनिल दुबे ने कहा कि हम अपनी पसंद की सीटें मांग रहे हैं, लेकिन उस पर बात बन नहीं रही है। नन्दा ने विश्वास जताया कि चुनाव बाद सपा-कांग्रेस गठबंधन फिर सत्ता में आएगा और अखिलेश यादव एक बार फिर मुख्यमंत्री बनेंगे।
दरअसल इससे पहले के घटनाक्रम में राष्ट्रीय लोक दल को जितनी सीटें समाजवादी पार्टी दे रही थी उससे वह ज्यादा सीटों की मांग कर रही थी। सीटों के बंटवारे पर खींचतान बढ़ा और कल महागठबंधन का ऐलान नहीं हो सका। यह भी खबर आई कि समाजवादी पार्टी ने इस पेंच के मद्देनजर कांग्रेस को अपनी कुछ सीटें राष्ट्रीय लोक दल को देने को कहा।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी कहा था कि कांग्रेस के साथ गठबंधन पर फैसला Сएक-दो दिन मेंТ कर लिया जाएगा। गठबंधन तय करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही हैं। इसी कवायद के तहत कांग्रेस को अखिलेश की अगुवाई वाली समाजवादी पार्टी 90 से 100 सीटों की पेशकश कर रही है। समाजवादी पार्टी ने राष्ट्रीय लोक दल को भी इस गठजोड़ में शामिल करने की कोशिश की लेकिन सीटों को लेकर बात अटक गई और अंत में राष्ट्रीय लोक दल गठबंधन में शामिल नहीं हुआ।
उत्तर प्रदेश में कुल 403 विधानसभा सीटें हैं और गठबंधन की सूरत में सबसे ज्यादा सीटों पर अखिलेश की पार्टी लड़ेगी। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सहित ज्यादातर विपक्षी पार्टियों का मानना है कि नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली भाजपा को उत्तर प्रदेश में रोकना जरूरी है, क्योंकि इस राज्य के विधानसभा चुनावों के परिणाम का अगले लोकसभा चुनाव पर काफी असर पड़ने की संभावना है।
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