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भारत और यूएई ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा कि कुछ देश आतंकवाद फैलाने के लिए धर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसे कहीं से भी सही नहीं ठहराया जा सकता। दोनों देशों ने आतंकवाद से निपटने के लिए जीरो टालरेंस पॉलिसी अपनाने की बात कही है। बता दें कि इस बार रिपब्लिक डे परेड के मौके पर अबू धाबी के प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जाएद अल नाह्यान चीफ गेस्ट थे।
गुरुवार को भारत-यूएई ने साझा बयान जारी किया। इसके मुताबिक, दोनों देश नफरत फैलाने और आतंकी मंसूबों को अंजाम देने वाले गुटों और देशों के खिलाफ मिलकर लड़ाई लड़ेंगे। नरेंद्र मोदी और शेख मोहम्मद ने बुधवार को द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बात की थी। इसके बाद दोनों देशों ने डिफेंस, ट्रेड, सिक्युरिटी और एनर्जी जैसे अहम क्षेत्रों में एक दर्जन से ज्यादा समझौतों पर साइन किए। दोनों देशों ने आतंकवाद का खात्मा, इन्फॉर्मेशन साझा करने और कैपेसिटी बिल्डिंग में बढ़ते द्विपक्षीय सहयोग पर संतोष जताया। दोनों पक्षों ने भरोसा जताया कि ये प्रयास क्षेत्रीय और वैश्विक शांति और सुरक्षा में योगदान देंगे।
भारत ने जनवरी 2016 में पठानकोट में एयरफोर्स के ठिकाने और सितंबर 2016 में उड़ी में आर्मी कैंप पर आतंकी हमले के बाद यूएई के सपोर्ट की सराहना की। स्टेटमेंट में ये भी कहा गया कि मोदी और अल नाह्यां ने काबुल और कंधार में 10 जनवरी को हुए आतंकी हमलों की जोरदार निंदा की और दोषियों को कठघरे में लाने पर जोर दिया। - मोदी ने इन हमलों में यूएई और अफगानिस्तान के नागरिकों की हुई मौत पर शोक जताया और घायल यूएई के डिप्लोमैट्स के जल्द ठीक होने की कामना की। दोनों देशों ने यूएन चार्टर और इंटरनेशनल कानूनों के मुताबिक, आतंकी नेटवर्कों, उनकी फंडिंग और एक्टिविटीज को खत्म करने की बात कही।
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