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नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी के कालकाजी स्थित मकान से चोर कई सामान चुरा ले गए जिसमें उन्हें मिले नोबेल पुरस्कार की प्रतिकृति और प्रशस्ति पत्र भी शामिल हैं। पनामा के राष्ट्रपति के निमंत्रण पर अपनी पत्नी के साथ पनामा गए सत्यार्थी ने एक बयान में तड़के हुई इस चोरी में शामिल लोगों से इस पुरस्कार के महत्व को समझने की मिन्नत की, न कि इसके मौद्रिक मूल्य के लालच में आने को कहा।
सत्यार्थी ने अपना नोबल शांति पुरस्कार जनवरी, 2015 में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को प्रदान कर दिया था और मूल पदक को संरक्षित रखा गया है और अब यह राष्ट्रपति भवन के संग्रहालय में प्रदर्शित है। पुलिस ने कहा कि यह मामला उस समय प्रकाश में आया जब सत्यार्थी के एनजीओ बचपन बचाओ आंदोलन के राकेश सेंगर सुबह करीब 9 बजे कार लेने के लिए कालकाजी स्थित सत्यार्थी के मकान गए।
सेंगर ने कहा, मैं सुबह करीब 9 बजे वहां गया था। मैंने धोबी को दरवाजा खटखटाते देखा जो अचानक खुल गया। जब मैंने फ्लैट में प्रवेश किया तो पाया कि (सत्यार्थी के शयनकक्ष में) चीजें बिखरी हुई थीं। लॉकर भी टूटा हुआ था। नोबल की प्रतिकृति जोकि मूल जैसी दिखती है और प्रशस्ति पत्र भी गायब थे। बचपन बचाओ आंदोलन के कालकाजी कार्यालय में 2010 में भी इसी तरह की चोरी हुई थी। पुलिस ने कहा कि ऐसा लगता है कि चोर केवल आभूषण चुराने के इरादे से आए थे क्योंकि अन्य महंगी चीजें हाथ नहीं लगाई गईं। उन्होंने इस प्रतिकृति को गलती से आभूषण की वस्तु समझ ली होगी।
नोबल पुरस्कार की प्रतिकृति और प्रशस्ति पत्र आभूषण के बक्से में रखे थे और हमें संदेह है कि वे इन्हें आभूषण समझकर उठा ले गए होंगे। उन्होंने कहा कि सत्यार्थी के बेटे भुवन रिभु जोकि उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और बचपन बचाओ आंदोलन के राष्ट्रीय सचिव हैं, ने बताया, सेंगर ने मुझे इस घटना की जानकारी दी। ऐसा लगता है कि वे कुछ खास चीज तलाश रहे थे। वे कुछ पुश्तैनी जेवर भी ले गए। डीडीए के फ्लैट में रह रहा हर कोई इस खबर से अचंभित है। सत्यार्थी 10 तारीख को स्वदेश लौट रहे हैं। पुलिस को नोबल पुरस्कार की प्रतिकृति की कथित चोरी के बारे में सूचना मिलने के बाद फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी की टीमें, खोजी कुत्ते के दस्ते और जिला अपराध इकाई ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और अंगुलियों के निशान संग्रह किए।
पुलिस ने कहा कि सभी लॉकर तोड़े गए हैं और संदेह है कि यह चोरी आज तड़के की गई। बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले सत्यार्थी को 2014 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्हें यह सम्मान पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई के साथ साझा रूप से मिला। उल्लेखनीय है कि रबीन्द्रनाथ टैगोर का नोबल पुरस्कार पदक 2004 में विश्व भारती विश्वविद्यालय के संग्रहालय से चोरी हो गया था जिसे अभी तक बरामद नहीं किया जा सका है।
पुलिस ने कहा कि सत्यार्थी के आवास के निकट प्रवेश द्वार पर कोई गार्ड तैनात नहीं है। सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद पुलिस को कोई खास सीसीटीवी फुटेज नहीं मिले क्योंकि कई कैमरे खराब हैं। उन्होंने कहा, पांच सीसीटीवी कैमरे काम करने की स्थिति में नहीं थे। करीब दो-तीन कैमरे चालू हालत में हैं और हम उनके फुटेज से सुराग तलाश रहे हैं।
संयुक्त पुलिस आयुक्त (दक्षिण पश्चिम) और दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता दीपेन्द्र पाठक ने कहा, अपराध शाखा इस जांच में दक्षिण पश्चिम जिला पुलिस की मदद कर रही है और आरोपियों की पहचान के लिए हर प्रयास किए जा रहे हैं। सत्यार्थी के मकान की तरह ही उसी इलाके में दो अन्य मकानों में भी सेंध लगाई गई है। इन सभी मकानों के ताले तोड़े गए। इन मकानों के बारे में किसी ने सूचना दी होगी कि कई दिनों से इन मकानों में ताले लगे हैं।
ऐसा संदेह है कि इस चोरी में शामिल गिरोह ने दिन के दौरान किसी बहाने से इस रिहाइशी इलाके में प्रवेश किया होगा और ताला लगे मकानों को देखने के लिए टोह ली होगी। पुलिस को संदेह है कि इन मकानों में कोई नहीं है, यह सूचना सोसाइटी से दूध पहुंचाने वाले या हॉकर (अखबार पहुंचाने वाला) जैसे किसी व्यक्ति ने दी होगी। इन मकानों में कोई नहीं है, इसका संकेत चोरों को इस बात से भी मिला होगा कि कई दिनों से इन अपार्टमेंट के बाहर अखबार पड़े थे।
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