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पीएम मोदी ने मनमोहन सिंह पर की तीखी टिप्पणी तो राज्यसभा में बिफरी कांग्रेस, सदन से किया वॉकआउट

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के बजट सत्र के दौरान राज्यसभा में बुधवार को अपने भाषण की शुरुआत नोटबंदी के मुद्दे से की। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए पीएम मोदी ने माना कि नोटबंदी से कुछ परेशानी तो हुई है, लेकिन नोटबंदी का कदम किसी को परेशान करने के लिए नहीं उठाया गया था। अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने जब नोटबंदी के संदर्भ में डॉ. मनमोहन सिंह को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की तो कांग्रेस सांसदों ने सदन में हंगामा खड़ा कर दिया और सभापति के मना करने के बावजूद कांग्रेस के सभी सांसद सदन से वॉकआउट कर गए।
 
नोटबंदी को संगठित एवं कानूनी लूट का उदाहरण बताने के बयान को लेकर मनमोहन सिंह पर तीखा प्रहार करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को कहा कि 35 वर्षों तक देश के आर्थिक पदिदृश्य के केंद्र में रहने वाले डॉ. मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्रित्व काल में इतना सब कुछ हुआ लेकिन उनके ऊपर कोई दाग तक नहीं लगा। "बाथरूम में रेनकोट पहनकर नहाने की कला डॉ. साहबТ ही जानते हैं और कोई नहीं जानता।" बयान से नाराज कांग्रेस के सदन से वॉकआउट करने पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि हर बात में विरोध ठीक नहीं है और कांग्रेस किसी भी रूप में पराजय स्वीकार ही नहीं करना चाहती। यह कब तक चलेगा। प्रधानमंत्री के जवाब के बाद माकपा, भाकपा, तृणमूल कांग्रेस और अमर सिंह को छोड़ सपा के सदस्यों ने भी राष्ट्रपति के अभिभाषण में अपना संशोधन अस्वीकार करने के कारण सदन से वाकआउट किया।
 
राष्ट्रपति के अभिभाषण को लेकर धन्यवाद प्रस्ताव पर राज्यसभा में चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, पिछले सत्र में मनमोहन सिंह जी ने कुछ कहा था। करीब-करीब 35 साल तक वह देश के आर्थिक परिदृश्यों के केंद्र में रहे। डॉ. साहब पूर्व प्रधानमंत्री हैं और वे आदरणीय हैं। हिन्दुस्तान में पिछले 30-35 वर्षों के आर्थिक परिदृश्य में उनका दबदबा रहा है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद 70 साल में हिन्दुस्तान में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति है जिसका आर्थिक परिदृश्य में इतना दबदबा रहा। हम राजनीतिज्ञों को इनसे काफी कुछ सीखने की जरूरत है। इनके समय इतना सब कुछ हुआ, घोटाले हुए लेकिन इनके ऊपर एक दाग तक नहीं लगा। बाथरूम में रेनकोट पहनकर नहाने की कला डॉ. साहबТ ही जानते हैं और कोई नहीं जानता। प्रधानमंत्री के बयान पर ऐतराज व्यक्त करते हुए कांग्रेस सदस्यों ने सदन से वाकआउट किया।
 
उल्लेखनीय है कि पिछले सत्र में नोटबंदी पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए मनमोहन सिंह ने कहा था कि विमुद्रीकरण को जिस तरह से लागू किया गया है, वह ऐतिहासिक कुप्रबंधन है और संगठित एवं कानूनी लूट का उदाहरण है। शीतकालीन सत्र में मनमोहन सिंह द्वारा उपयोग किये गए शब्दों के चयन से क्षुब्ध मोदी ने कहा कि सदन में जब लूट और प्लंडर जैसे शब्द इस्तेमाल किये जाते हैं, तब समझना चाहिए कि मर्यादा क्या होती है। हममें लोकतंत्र और संविधान के दायरे में रह कर उसी रूप में जवाब देने का सामर्थ्य है।
 
प्रधानमंत्री ने नोटबंदी के समर्थन में दिये गए दिग्गज वामपंथी नेता ज्योर्तिमय बसु और हरकिशन सिंह सुरजीत के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि सीताराम येचुरी के दल को विमुद्रीकरण का समर्थन करना चाहिए। कांग्रेस सदस्यों के वाकआउट पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यदि वे मर्यादा का उल्लंघन करते हैं तो उनमें जवाब सुनने का भी माद्दा होना चाहिए। नोटबंदी के विरोध पर वामदलों को आड़े हाथों लेते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सीताराम येचुरी की पार्टी की और हमारी पार्टी की विचारधारा में अंतर है लेकिन मैं यह सोचता था कि वे इस कदम का समर्थन करेंगे।
 
दिग्गज वामपंथी नेता ज्योर्तिमय बसु के 12 नवंबर 1970 को दिये गए भाषण का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि बसु ने कहा था कि इंदिरा गांधी कालेधन पर बनी हुई हैं, उनकी राजनीति कालेधन पर बची हुई है और इसलिए उनकी सरकार ने कालेधन संबंधी वांगचू समिति की रिपोर्ट को लागू नहीं किया और उसे डेढ़ साल तक दबाये रखा। प्रधानमंत्री ने 4 सितंबर 1972 के बसु के भाषण का जिक्र किया जिसमें विमुद्रीकरण एवं अन्य उपायों की सिफारिश की गई थी और कहा गया था कि इंदिरा गांधी की सरकार कालेधन की सरकार, कालेधन द्वारा और कालेधन के लिए है। उन्होंने कहा कि माकपा नेता हरकिशन सिंह सुरजीत ने इसी सदन में 27 अगस्त 1981 को पूछा था कि क्या काले धन पर रोक लगाने के लिए कोई कदम उठाए जा रहे हैं और साथ ही 100 रूपये के नोट बंद करने के बारे में भी उन्होंने सवाल उठाया था। मोदी ने कहा कि हमारे विचार अलग अलग हो सकते हैं, लेकिन जनहित में उठाये गए कदमों को हम सब को मिलकर बढ़ावा देना चाहिए।
 
नोटबंदी के निर्णय को दुनिया में किया गया ऐसा सबसे बड़ा कदम करार देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह ऐसा कदम था जिसकी कोई तुलना नहीं है। दुनिया में इतने बड़े पैमाने पर ऐसा कोई व्यापक निर्णय नहीं किया गया। और इसलिए दुनिया के अर्थशास्त्रियों को इसका लेखाजोखा लेने में समय लगेगा। यह तो दुनिया के अर्थशास्त्रियों और विश्वविद्यालियों के लिए केस स्टडी बन सकता है। राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर कुल 651 संशोधन पेश किए गए जो या तो अस्वीकृत कर दिए गए या वापस ले लिये गए। इसके बाद उच्च सदन ने राष्ट्रपति के प्रति कृतज्ञता जताते हुए उनके अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पहली बार देश में ऐसा दृश्य देखने को मिला है जब सरकार और जनता एक साथ खड़ी दिख रही है। नोटबंदी के विरोध पर विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि ये जनता से इतने कटे हुए हैं कि इन्हें जनता जनार्दन के मिजाज का पता ही नहीं है।
 
प्रधानमंत्री के भाषण में ज्यादा जोर विमुद्रीकरण के विषय पर था। उन्होंने कहा कि नोटबंदी का उद्देश्य न केवल कालेधन पर और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना था बल्कि आतंकवाद के वित्त पोषण को रोकना भी था। कालाधन और भ्रष्टाचार के विरूद्ध लड़ाई कोई राजनीतिक लड़ाई नहीं है, यह किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं है। इससे किसी को अपने आप को जोड़कर देखने की जरूरत नहीं है। मोदी ने कहा कि देश में ईमानदार व्यक्ति को ताकत तब ही मिलेगी जब बेइमानी पर अंकुश लगाया जाएगा। हमने नोटबंदी के जरिये ईमानदार व्यक्ति को ताकत देने की कोशिश की है। हमें उनके विरूद्ध सख्त बनना होगा जो व्यवस्था के साथ धोखा कर रहे हैं, जब हम ऐसा करेंगे तो गरीबों के हाथ मजबूत होंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत उन खामियों को दुरूस्त करने में जुटा है जो हमारे समाज में घुस गयी हैं।
 
उन्होंने कहा कि आज कालाधन, आतंकी संगठन, जाली नोट, नशीली दवाओं का कारोबार, भ्रष्टाचार आदि का दायरा बहुत बढ़ चुका है। नोटबंदी से इन सब पर रोक लगाने की हमने कोशिश की है। उन्होंने यह भी कहा कि देश में नवंबर एवं दिसंबर के दौरान 30 से 40 दिन में 700 से अधिक माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया। यह पहली बार हुआ है और यह सिलसिला जारी है। यह नोटबंदी की वजह से ही संभव हो पाया है। मुठभेड़ में मारे गए आतंकवादियों के पास से 2000 रूपये के नए नोट मिलने के बारे में मोदी ने कहा कि हमें यह समझना चाहिए कि विमुद्रीकरण के निर्णय के बाद उनके पास रोजमर्रा की जरूरत के लिए पैसे नहीं थे। इसलिए बैंक लूटने की घटना भी सामने आई। इसीलिए बाद में मारे गए आतंकवादियों के पास से नए नोट बरामद हुए। जाली नोटों के खिलाफ शिकंजा कसने से उन्हें (आतंकवादियों को) समस्या हुई। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें एक आवाज बनकर लड़ना होगा।
 
नोटबंदी को लेकर आरबीआई के गवर्नर की आलोचना किए जाने के संबंध में मोदी ने कहा कि हमारी पार्टी, हमारी सरकार और मुझ पर हमले तो समझ में आते हैं लेकिन आरबीआई गवर्नर को क्यों इसमें घसीटा गया? यह अच्छा नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आरबीआई जैसी संस्थाओं को विवाद में घसीटना ठीक नहीं है। पहले भी अगर किसी ने ऐसा करने का प्रयास किया तब मैंने उसका विरोध किया था। उन्होंने साथ ही आरबीआई को और स्वायत्ता देने की अपनी सरकार की पहल को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर को विवादों से परे रखना चाहिए। अर्थव्यवस्था चलाने में आरबीआई की बड़ी भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि लेकिन आरबीआई और सरकार की गरिमा पर आरोप लगाने वालों के लिए मैं कहना चाहूंगा कि पूर्व गवर्नर सुब्बाराव ने अपनी किताब में तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम पर लिक्विडिटी के विषय पर कुछ आरोप लगाए थे। इस पर अब तक किसी ने जवाब नहीं दिया है। इसलिए हम पर आरोप लगाने वाले पहले अपने गिरेबान में झांकें।
 
मोदी ने कहा कि हमने आरबीआई कानून में संशोधन किया। आरबीआई की मॉनिटरिंग समिति हमने बनाई जिसमें केंद्र सरकार का एक भी सदस्य नहीं है। यह स्वायत्तता हमने आरबीआई को दी है। नोटबंदी का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इंदिरा गांधी के समय में यह विचार सामने आया था। यशवंत राव चव्हाण यह विचार लेकर उनके पास गए थे लेकिन चुनावी राजनीति के कारण इस पर अमल नहीं किया गया।
 
कांग्रेस सदस्यों की टोकाटोकी के बीच मोदी ने कहा कि इस बात का जिक्र गोडबोले जी की किताब में है। उन्होंने सवाल किया कि जब माधव गोडबोले जी की किताब छपी थी तब आपने (कांग्रेस) इसका विरोध क्यों नहीं किया? आप सोये हुए थे क्या? अगर आपकी जगह मैं होता तो केस कर देता। उन्होंने कहा कि देश की औपचारिक आर्थिक व्यवस्था में धन होना भी जरूरी है। यह हकीकत है और इससे इंकार नहीं किया जा सकता। नोटबंदी की वजह से बैंकों के पास मुद्रा आई, इससे बैंकों को मजबूती मिलेगी और उन्हें अपनी ब्याज दरों को कम करने की क्षमता मिलेगी।
 
डिजिटल लेनदेन और कैशलैस व्यवस्था की वकालत करते हुए मोदी ने कहा कि असंगठित कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा का अभाव बड़ी समस्या है। अगर कैशलैस व्यवस्था हम खड़ी करते हैं तो इस वर्ग को बहुत बड़ा लाभ और सुरक्षा मिलेगी। मोदी ने कहा कि अब किसान 500 मंडियों में मोबाइल फोन के जरिये अपना उत्पाद बेच सकते हैं। खाद्य प्रसंस्करण की सुविधा भी उन्हें दी गई है। मोदी ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में इतने कड़े फैसले करना आसान नहीं होता। साथ ही इतने बड़े फैसले को समझने में भी समय लगता है। लेकिन धीरे धीरे सबको यह बात समझ मे आ जाएगी। डिजिटल व्यवस्था के बारे में उन्होंने कहा, Сकई तरह की बातें चल रही हैं मानो यह 70 साल की पिछली सरकारों का रिपोर्ट कार्ड है। कोई यह नहीं कह रहा कि हिंदुस्तान के हर कोने में डिजिटल व्यवस्था है। लेकिन सवाल यह है कि मानसिकता बदलने के लिए हम संभावना वाले क्षेत्र में ऐसा कर सकते हैं या नहीं कर सकते।Т 
 
उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में, जिन इलाकों में हम ऐसा कर सकते हैं, उनमें हमें ऐसा करना चाहिए। मोदी ने कहा कि देश में कैशलैस का मतलब है कि धीरे धीरे समाज को इस तरह के भुगतान की दिशा में ले जाना। समृद्ध देशों में भी मतपत्र छाप कर ठप्पा लगाया जाता है। लेकिन भारत में बटन दबा कर मतदान किया जाता है। कहने का मतलब है कि हम अपने देश की शक्ति को कम करके न आंकें। असुविधा तो होगी। लेकिन आगे भी बढ़ना होगा। 
 
उन्होंने कहा कि कोरिया ने डिजिटल तरीके के लिए Сप्रोत्साहन योजनाТ बनाई है। हमने Сभीम एप्पТ बनाया जिस पर एक रूपये का भी खर्च नहीं आता। दुनिया पेपरलैस लेनदेन की ओर जा रही है और हमें भी अपने अपने इलाके में इस संबंध में लोगों को समझाने की कोशिश करनी चाहिए। रेलवे में आज 60 से 70 फीसदी ऑनलाइन बुकिंग हो रही है। उन्होंने कहा कि पहले बिजली का बिल भरने के लिए आधे दिन की दफ्तर से छुट्टी लेनी पड़ती थी। लेकिन आज यह मोबाइल फोन से पलक झपकते ही संभव है। हमें प्रौद्योगिकी के नकारात्मक पक्षों के बारे में सोचना चाहिए लेकिन प्रौद्योगिकी का फायदा भी उठाना चाहिए। आज कार्ड से भुगतान आम बात हो गई है।
 
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह समाज की व्यवस्था में बड़े बदलाव की एक कोशिश है। हमने लोगों की आशा और आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में प्रयास किया है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) योजना की व्यवस्था से हम लीकेज होने वाले 50 हजार करोड़ रूपये की बचत करने में सक्षम हुए हैं तथा बिचौलियों की लूट पर रोक लगी है। हमें डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए प्रयास करने चाहिए। आधार के जरिये भुगतान की प्रौद्योगिकी विकसित की जा रही है और इन्हें समझने तथा लागू करने की कोशिश करनी चाहिए। भीम एप्प को उत्तम बताते हुए उन्होंने कहा कि इसे लोकप्रिय बनाने पर किसी बाहरी एजेंसी के उपयोग की जरूरत नहीं होगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि पेट्रोल पंप पर करीब 30 फीसदी लोग डिजिटल तरीके से काम कर रहे हैं। 
 
बैंकिंग सिस्टम का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि हमारी सरकार ने रिकवरिंग ट्रिब्यूनल की रचना की। बैंकों में नियुक्तियों के लिए व्यवस्था नहीं थी और हमने बैंक बोर्ड ब्यूरो बनाया। हमारी बैंकिंग व्यवस्था को वैश्विक स्तर पर लाने के लिए कई बैठकों में मंथन किया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछली सभी सरकारों ने कुछ न कुछ योगदान दिया है। हमने यह बात हमेशा कही है। हमने भी कई छोटे छोटे लेकिन महत्वपूर्ण कदम उठाये हैं। प्रमाणपत्रों को स्वयं अभिप्रमाणित करने की व्यवस्था इनमें शामिल है। हमने अराजपत्रित नौकरियों में इंटरव्यू समाप्त कर प्रावीण्यता को आधार बनाया। वरिष्ठ पदों पर नियुक्ति के लिए भी मेरिट को आधार बनाया गया है जिसकी सराहना भी हुई है।
 
उन्होंने कहा कि अब 24 घंटे में कंपनी के पंजी&#


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