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तमिलनाडु में सरकार गठन पर सस्पेंस बरकरार, राज्यपाल से मिलकर शशिकला ने पेश किया सरकार बनाने का दावा

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राज्यपाल सी. विद्यासागर राव के साथ भेंट के दौरान वीके शशिकला द्वारा सरकार गठन का दावा करने के बाद इस बात यह संशय बना हुआ है कि उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाएगा या नहीं क्योंकि राज्यपाल ने अपने अगले कदम के बारे में कोई संकेत नहीं दिया है।
 
राव से कार्यवाहक मुख्यमंत्री ओ. पनीरसेल्वम की भेंट के कुछ घंटे बाद शशिकला राजभवन में उनसे मिलीं और उन्होंने सरकार गठन का दावा करते हुए उन्हें पत्र सौंपा। इस पत्र में उन विधायकों के नाम हैं जिन्होंने उन्हें रविवार को अन्नाद्रमुक विधायक दल का नेता चुना था। शशिकला ने अन्नाद्रमुक विधायकों के अलग अलग समर्थन पत्र भी सौंपे।
 
वैसे फिलहाल इस संबंध में कोई बयान नहीं आया है कि राज्यपाल क्या करेंगे लेकिन कुछ रिपोर्टों के अनुसार वह कोई भी कदम उठाने से पहले और कानूनी राय लेना चाहेंगे। राज्यपाल से शशिकला की भेंट करीब 40 मिनट चली। शाम पांच बजे पनीरसेल्वम ने राव से भेंट की थी। संक्षिप्त मुलाकात के बाद उन्होंने संवाददाताओं से कहा था कि अच्छा ही होगा और धर्म की जीत होगी। उन्हें फिलहाल पूर्व मंत्री के पी मुनुसामी, नथम आर विश्वानाथन, राज्यसभा सदस्य वी मैत्रियन और कुछ वर्तमान विधायकों का समर्थन प्राप्त है।
 
सरकार गठन का दावा करने जाने से पहले अन्नाद्रमुक महासचिव शशिकला हरी साड़ी पहनकर कुछ वरिष्ठ मंत्रियों समेत अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ दिवंगत मुख्यमंत्री जे जयललिता के स्मारक पर पहुंचीं। शशिकला ने स्मारक पर एक बड़ा लिफाफा रखा । समझा जाता है कि उसमें उन विधायकों की सूची है जिन्होंने मुख्यमंत्री पद के लिए उनकी उम्मीदवारी पर मुहर लगायी है। उन्होंने स्मारक पर गुलाबी की पंखुड़ियां अर्पित कीं।
 
अन्नाद्रमुक ने दावा किया है कि पनीरसेल्वम की बगावत के आलोक में कल शशिकला द्वारा बुलायी गयी बैठक में 131 विधायक शामिल हुए थे। शशिकला के खिलाफ बगावत करने से पहले पनीरसेल्वम ने छह फरवरी को राज्यपाल केा अपना इस्तीफा सौंपा था। राज्यपाल ने उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था होने तक पद पर बने रहने को कहा था। पनीरसेल्वम ने इस्तीफा देने के लिए बाध्य करने का दावा करते हुए बगावत किया है।
 
पनीरसेल्वम कह रहे हैं कि यदि लोग और पार्टी कार्यकर्ता चाहते हैं तो वह अपना इस्तीफा वापस लेने पर पुनर्विचार करने को तैयार हैं। वैसे शशिकला को ज्यादातर पार्टी विधायकों का समर्थन जान पड़ता है लेकिन बगावत के बाद पनीरसेल्वम के प्रति जनसमर्थन बढ़ने की बात सामने आ रही है। शशिकला के अन्नाद्रमुक पार्टी विधायक दल के नेता चुने जाने के बाद भी मुम्बई में ठहरे रहे राज्यपाल आज दोपहर बाद यहां पहुंचे। राव के पास महाराष्ट्र के साथ साथ तमिलनाडु के राज्यपाल का भी प्रभार है।
 
पनीरसेल्वम अपने पास पार्टी के अधिकतर विधायकों का समर्थन होने का दावा कर रहे हैं और उनका कहना है कि वे सदन के पटल पर अपना बहुमत साबित कर देंगे लेकिन उन्होंने अपना समर्थन करने वाले अन्नाद्रमुक विधायकों की संख्या का खुलासा नहीं किया। जयललिता की विरासत एवं मुख्यमंत्री के पद को लेकर जारी लड़ाई के बीच पनीरसेल्वम ने आरोप लगाया कि शशिकला ने दिवंगत नेता के साथ विश्वासघात किया और मांग की कि अम्मा के पोएस गार्डेन निवास को स्मारक घोषित कर दिया जाना चाहिए।
 
शशिकला द्वारा उन्हें विश्वासघाती कहे जाने पर पलटवार करते हुए पनीरसेल्वम कहा कि वेदा निलयम पोएस गार्डन घर से जयललिता ने जिन लोगों को 2011 में निकाल दिया था, उन्हें जगह देकर शशिकला ने अम्मा के साथ विश्वासघात किया है। उन्होंने कहा कि जयललिता के घर को स्मारक घोषित किया जाना चाहिए, जहां शशिकला अब भी रह रही हैं। उनके निजी सामान की सुरक्षा की जानी चाहिए।
 
पनीरसेल्वम ने कहा, उसे स्मारक घोषित करने के संघर्ष की दिशा में यह पहला कदम है। अपने समर्थकों के बीच अन्नाद्रमुक के अध्यक्षमंडल के अध्यक्ष ई मधुसूदन का स्वागत करते हुए उन्होंने दावा कि निष्कासन के बाद पार्टी में फिर से वापस लिये जाने पर शशिकला ने जयललिता को कथित रूप से जो पत्र लिखा था, उसमें उन्होंने यह झूठी घोषणा की कि उन्होंने अम्मा के साथ विश्वासघात करने की बात सोची तक नहीं थी।
 
ई मधुसूदन शशिकला को मुख्यमंत्री बनाने के खिलाफ हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, शशिकला कह रही हैं कि मैंने विश्वासघात किया। किसने विश्वासघात किया? 2012 में अम्मा को उनके द्वारा लिखा गया पत्र ही बताएगा कि किसने (अम्मा एवं पार्टी के साथ) विश्वासघात किया है। उन्होंने समर्थकों के सामने पत्र पढ़ते हुए दावा किया कि शशिकला ने खुद माना था कि जो उनके परिजनों एवं दोस्तों के किया वह माफ करने के लायक नहीं है और एक बड़ा विश्वासघात है। 
 
मुख्यमंत्री ने साथ ही पूछा कि उन्हें दिवंगत मुख्यमंत्री के घर में जगह देकर क्या शशिकला ने विश्वासघात नहीं किया। पनीरसेल्वम ने कहा, लोग शशिकला को सबक सिखाएंगे। उन्होंने दावा किया कि शशिकला ने तब कहा था कि वह सार्वजनिक जीवन में खुद को शामिल नहीं करना चाहतीं और ना ही सत्ता या पदों में उनकी रूचि है। लेकिन अब वह नाटक कर रही हैं और सत्ता हड़पने की कोशिश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, मैं अम्मा के निधन के बाद पार्टी हितों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री बनने पर सहमत हुआ था।


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