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अन्नाद्रमुक महासचिव वीके शशिकला आज अदालत में आत्मसमर्पण करने के बाद बेंगलुरू की केद्रीय जेल लौट आयीं। उन्होंने ए-क्लास सेल मांगी थी, लेकिन फिलहाल उन्हें 2 अन्य कैदियों के साथ रखा गया है। जेल में उन्हें कैदी नम्बर 9234 कहा जाएगा। शशिकला को कैंडल बनाने का काम दिया गया है। इसके बदले में उन्हें हर दिन 50 रुपए मिलेंगे। मंगलवार को ही सुप्रीम कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति मामले में उनकी दोषसिद्धि बरकरार रखी थी और आदेश दिया था कि वह चार साल की कैद की बाकी अवधि की सजा तत्काल काटें।
बेंगलुरु के लिए निकलने से पहले शशिकला जयललिता की समाधि पर भी गईं। वहां कुछ देर हाथ जोड़कर प्रार्थना करती रहीं। झुककर 3 बार उन्हें नमन किया। फिर, मन ही मन कुछ प्रार्थना करती रहीं। इसके बाद 3 बार जोर से समाधि पर थपकी दी। पार्टी से जुड़े लोगों का कहना है कि शशिकला ने समाधि पर थपकी देकर शपथ ली कि मैं जल्द ही लौटकर आपके सपने को पूरा करूंगी। जो लोग पार्टी के खिलाफ साजिश कर रहे हैं उनसे निपटा जाएगा। तमिल ट्रेडिशन के मुताबिक, किसी की समाधि पर तीन बार थपकी देने के ये मायने हैं कि आप किसी के नाम पर शपथ लेकर कोई बड़ा संकल्प ले रहे हैं। शशिकला, जयललिता की समाधि पर करीब 10 मिनट तक रहीं।
60 वर्षीय शशिकला विशेष अदालत के न्यायाधीश अश्वथनारायण के सामने पेश हुईं। उससे पहले शीर्ष अदालत ने कैद की सजा के वास्ते आत्मसमर्पण करने के लिए और वक्त देने की उनकी अर्जी पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। उसके बाद वह सड़क मार्ग से कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू के लिए चेन्नई से रवाना हुईं। वह परप्पना अग्रहारा में केंद्रीय जेल में ही बनायी गयी अदालत में गयीं। यह जगह कर्नाटक-तमिलनाडु सीमा पर होसुर से 28 किलोमीटर दूर है।
दरअसल बेंगलुरू के अदालत कक्ष को सुरक्षा कारणों से परप्पना अग्रहारा स्थित केंद्रीय जेल में स्थानांतरित किया गया था। वहीं शशिकला ने आत्मसमर्पण किया। अधिकारियों ने बताया कि अदालती औपचारिकताएं पूरी करने और मेडिकल चेकअप के बाद शशिकला को सलाखों के पीछे डाल दिया गया। न्यायाधीश ने भी आत्मसमर्पण के वास्ते दो हफ्ते का और वक्त देने और घर के खाने की इजाजत देने से इनकार कर दिया।
पुलिस के अनुसार शशिकला के काफिले के अदालत परिसर पहुंचने के शीघ्र बाद काफिले की चार कारें क्षतिग्रस्त हो गयी। फिलहाल यह पता नहीं चल पाया कि ऐसा किसने किया। आय से अधिक संपत्ति मामले में सितंबर 2014 में निचली अदालत के दोषी करार दिये जाने के बाद तमिलनाडु की दिवंगत मुख्यमंत्री जयललिता, शशिकला और उनके रिश्तेदारों वीके सुधाकरन एवं जे. इलावरासी ने तीन सप्ताह जेल में बिताये थे। तत्पश्चात, सुप्रीम कोर्ट से उन्हें जमानत मिली।
सुधाकरन एवं इलावरासी ने भी आज अदालत में आत्मसमर्पण किया। निचली अदालत में हुई उनकी दोषसिद्धि भी सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखी थी। जयललिता का निधन हो जाने के कारण उनके विरूद्ध मामला रोक दिया गया। बेंगलुरू रवाना होने से पहले भावुक शशिकला चेन्नई में जयललिता के स्मारक पर गयीं। उन्हें मन ही मन कुछ कहते हुए देखा गया लेकिन भारी भीड़ के शोरगुल के चलते उनकी आवाज सुनाई नहीं पड़ी।
मंगलवार रात उन्होंने कूवाथूर के रिसॉर्ट में अपने विधायकों और पोएस गार्डन पर अपने समर्थकों से भी कहा था, "मुझे जेल में डाला जा सकता है, मेरे मन में पार्टी के प्रति जो चिंता है, उसे नहीं। मैं जहां कहीं होउंगी, मेरा मन यहीं रहेगा।" उन्होंने कहा कि वह रात-दिन पार्टी के बारे में चिंतन करती रहेंगी और कोई भी ताकत उन्हें उनकी पार्टी से अलग नहीं कर सकती।
आत्मसमर्पण के वास्ते और वक्त देने की शशिकला की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति पीसी घोष की अगुवाई वाली पीठ ने कहा, हम इस पर कोई आदेश जारी करने को इच्छुक नहीं हैं। हम फैसले में कोई बदलाव नहीं करने जा रहे। पीठ ने कल ही आय के ज्ञात स्रोत से अधिक संपत्ति के मामले में उन्हें और दो अन्य को दोषी ठहराया था।
बुधवार को सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि अभियुक्तों के आत्मसमर्पण के बारे में फैसले में तत्काल शब्द का इस्तेमाल किया गया है। न्यायमूर्ति घोष ने कहा, मैं आशा करता हूं कि आप (वकील टीएस तुलसी) तत्काल का मतलब समझते हैं। शशिकला की ओर से पेश वरिष्ठ वकील के टीएस तुलसी ने कहा कि उनके मुवक्किल को आत्मसमर्पण के लिए कुछ वक्त चाहिए क्योंकि उन्हें अपनी चीजें भी संभालनी है। तुलसी इस आवेदन पर आज ही तुरंत सुनवाई की मांग कर रहे थे।
पोएस गार्डन से विदा होने से पहले शशिकला के पक्ष में उनके समर्थकों ने नारेबाजी की। समर्थक उन्हें चिनम्मा कहते हैं। वह पिछले दिसंबर में जयललिता के निधन के बाद से पोएस गार्डन में ही ठहरी हुई थीं। जयललिता के स्मारक पर शशिकला समर्थकों की भीड़ के बीच से वहां पहुंचीं। वहां उनके समर्थकों मे पूर्व मंत्री गोकुल इंदिरा और पार्टी उपमहासचिव एवं भतीजा टीटीवी दिनाकरन भी थे। उनकी आंखों में आंसू थे। शशिकला अन्नाद्रमुक संस्थापक एम जी रामचंद्रन के रामनाथपुरम निवास पर भी गयीं और वहां उनकी प्रतिमा के सामने कुछ देर ध्यान लगाया।
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