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महाराष्ट्र निकाय चुनाव : मुंबई में बहुमत से दूर शिव सेना बनी सबसे बड़ी पार्टी, अन्य जगहों पर भी BJP का प्रदर्शन शानदार

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भाजपा ने महाराष्ट्र के निकाय चुनावों में शानदार जीत हासिल करते हुए राज्य के 10 नगर निगमों में से आठ में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि शिवसेना के गढ़ मुंबई में वह दूसरे स्थान पर रही। पार्टी उल्हासनगर, नासिक, पुणे, पिम्परी-चिंचवाड, सोलापुर, अकोला, अमरावती और नागपुर में शीर्ष पर रही जबकि मुंबई और उससे लगे ठाणे में शिवसेना पहले स्थान पर रही। शिवसेना के किले बृहन्मुंबई महानगरपालिका में बड़ी सेंध लगाते हुए भाजपा ने 82 सीटें जीतीं। शिवसेना के खाते में 84 सीटें आईं, लेकिन दोनों ही 114 के जादुई आंकड़े को छूने में असफल रहे।
 
गुरुवार को हुई मतगणना में मुंबई में कांग्रेस 31 सीटों के साथ तीसरे, राकांपा नौ सीटों के साथ चौथे और मनसे सात सीटों के साथ पांचवें स्थान पर रही। वहीं, पहली बार इस निकाय चुनाव में उतरी एआईएमआईएम को तीन, समाजवादी पार्टी को छह, अखिल भारतीय सेना को एक सीट मिली जबकि निदर्लीय उम्मीदवारों के खाते में चार सीटें गयीं।
 
25 जिला परिषदों में भाजपा ने 1,509 सीटों में से 397, राकांपा ने 336, कांग्रेस ने 293, शिवसेना ने 259, मनसे ने एक और अन्य ने 147 सीटें हासिल कीं। देर रात तक 76 सीटों के नतीजे आने बाकी थे। पंचायत समिति की 2,990 सीटों में से भाजपा को सबसे ज्यादा 803, राकांपा को 630, कांग्रेस को 555 और शिवसेना को 538 सीटें मिलीं। मनसे को केवल दो सीटों से संतोष करना पड़ा और अन्य के खाते में 281 सीटें गयीं। देर रात तक 181 सीटों के नतीजे आने बाकी थे।
 
मतदाताओं का धन्यवाद व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने कहा, हमारी जीत पारदर्शिता के हमारे एजेंडा को लोगों द्वारा स्वीकार किए जाने का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मतदाताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों तथा सबका विकास में विश्वास जताया। महापौर पद के लिए भाजपा तथा शिवसेना के बीच संघर्ष के बारे में उन्होंने कहा, दोनों पार्टियों की कोर कमेटी मिलेंगी और फैसला लेगी। हम लोगों के जनादेश का आदर करते हैं।
 
मुंबई भाजपा अध्यक्ष आशीष शेलार ने कहा कि पार्टी में मुंबई में 82 सीटें जीती हैं और उसके पास चार निर्दलीय पार्षदों का समर्थन है। इसलिए वह महापौर की कुर्सी के लिए दावा करने की स्थिति में है। उन्होंने कहा, यह भाजपा की ऐतिहासिक जीत है। हमारे पास शिवसेना से केवल 2 सीटें कम हैं। इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के विकास के एजेंडे को जाता है।
 
इस बीच, भविष्य की रणनीति के बारे में पूछे जाने पर शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे ने कहा, Сजल्दबाजी क्या है? कुछ समय इंतजार कीजिए। अभी हमने फैसला नहीं किया है कि कोई गठबंधन करना है या नहीं। हम ऐसा जल्द करेंगे।Т इससे पूर्व शुरूआती रुझानों में शिवसेना को लगभग 100 सीटें मिलती दिख रही थीं जिससे विशेषज्ञ यह कहने लगे थे कि उद्धव ठाकरे की पार्टी छोटे दलों या कुछ निर्दलियों के साथ मिलकर आसानी से बीएमसी में सत्तारूढ़ हो जाएगी।
 
कांग्रेस पार्टी 31 सीटों तक सिमटकर रह गई। इसकी शहर इकाई के अध्यक्ष संजय निरूपम ने हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की पेशकश की है। चुनाव से पहले वरिष्ठ नेता गुरदास कामत के साथ निरूपम का विवाद हो गया था। मतदाताओं ने राज ठाकरे की एमएनएस को जबर्दस्त झटका दिया है जिसकी सीटों का आंकड़ा वर्ष 2012 की 28 सीटों से गिरकर इस बार महज सात सीटों का रह गया। इसका पहला कारण मराठी मतों का शिवसेना के पक्ष में एकजुट होना है।
 
पिछले 25 साल से ठाणे महानगरपालिका पर शासन कर रही शिवसेना ने वहां की 131 में से 67 सीटें जीतकर अपना कब्जा बरकरार रखा। इसके बाद राकांपा को सबसे ज्यादा 34 सीटें मिलीं जबकि भाजपा 23 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर रही। कांग्रेस को महज चार सीटों से संतोष करना पड़ा। चार निर्दलीय भी चुनाव जीते।
 
भाजपा ने पुणे की 162 में से 98 सीटें जीतकर राकांपा का किला ध्वस्त कर दिया। वह शहर के निकाय में पहली बार सत्ता में आयी। राकांपा को 40, कांग्रेस को 11, शिवसेना को दस, मनसे को दो और निर्दलीय को एक सीटें मिलीं। भाजपा ने पुणे के पड़ोस में स्थित पिम्परी-चिंचवाड में भी राकांपा से सत्ता छीन ली। उसे 128 में से 78 सीटें मिलीं, जबकि राकांपा को 35, शिवसेना को नौ, निर्दलीय को पांच, मनसे को एक सीट मिली। कांग्रेस एक भी सीट जीतने में नाकाम रही। 
 
नागपुर में भाजपा ने लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की। उसने नागपुर महानगरपालिका की 155 सीटों में से 101 सीटें जीतीं। वहीं कांग्रेस ने 28, निर्दलीय ने दस, शिवसेना ने तीन और राकांपा ने केवल एक सीट जीती। 12 सीटों का नतीजा आना बाकी है। राज ठाकरे की मनसे के नियंत्रण में रही 122 सदस्यीय नासिक महानगरपालिका में भाजपा को सबसे ज्यादा 67, शिवसेना को 34, कांग्रेस एवं राकांपा को छह-छह जबकि मनसे को महज पांच सीटें मिलीं। निदर्लीय चार सीटों पर विजयी रहे।
 
78 सदस्यीय उल्हासनगर महानगरपालिका में भाजपा को 32, शिवसेना को 25, निर्दलीय को 16, राकांपा को चार सीटें और कांग्रेस को एक सीट मिली। सोलापुर महानगरपालिका की 102 सीटों में से भाजपा को 47, शिवसेना को 20, निर्दलीय को 17, कांग्रेस को 14 और राकांपा को चार सीटें मिलीं। अकोला महानगरपालिका की 80 सीटों में से भाजपा को 48, कांग्रेस को 13, शिवसेना को आठ, निर्दलीय को छह और राकांपा को पांच सीटें मिलीं।
 
अमरावती महानगरपालिका की 87 सीटों में से भाजपा को 45, निर्दलीय को 20, कांग्रेस को 15 और शिवसेना को सात सीटें मिलीं। हालांकि अमरावती जिला परिषद की 59 में से 27 सीटें जीतकर कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी रही और वह सहयोगियों की मदद से परिषद पर नियंत्रण स्थापित कर सकती है। वहीं भाजपा को 14, राकांपा को पांच, निर्दलीय को पांच, शिवसेना को दो, बसपा एवं आरपीआई (ए) को एक-एक सीट मिली।
 
 


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