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अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी ABVP ने DU छात्रा गुरमेहर कौर को धमकी देनेवाले की गिरफ्तारी की मांग की है। एबीवीपी ने आरोप लगाया कि रामजस कॉलेज में हिंसा बाहरी लोगों की वजह से हुई है। एबीवीपी ने कल दिल्ली यूनिवर्सिटी में पैदल मार्च करने का ऐलान किया है।
इस बीच दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस में विरोध रैली के दौरान एआईएसए के समर्थकों पर हमला करने के मामले में एबीवीपी के दो कथित कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। एलएसआर की छात्रा गुरमेहर कौर की तरफ से दिल्ली महिला आयोग में की गई शिकायत के संबंध में मामला दर्ज कर लिया गया। पुलिस उस अकाउंट की भी जांच करेगी जिससे धमकी भरा संदेश गुरमेहर को भेजा गया है।
इस बीच दिल्ली पुलिस ने कई ट्वीट कर कहा, दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा से ऑनलाइन बदसलूकी के संबंध में कल दिल्ली महिला आयोग की तरफ से शिकायत मिली। इसके बाद इलाके के पुलिस उपायुक्त ने उनसे बात की और आवश्यक सुरक्षा मुहैया कराई। शिकायत की साइबर सेल ने जांच की और प्राथमिकी दर्ज की गई। मामले की जांच जारी है। गुरमेहर को आश्वासन दिया गया कि दिल्ली पुलिस उन्हें सुरक्षा मुहैया कराएगी और सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी उस इलाके में गश्त लगाएंगे जहां वह रहती हैं।
शहीद कैप्टन मनदीप सिंह की बेटी गुरमेहर ने रामजस कॉलेज में हुई हिंसा के बाद मैं "ABVP से नहीं डरती" अभियान शुरू किया था। ये अभियान वायरल हो गया और इसे देश भर के विश्वविद्यालयों के छात्रों से समर्थन मिला। पुलिस के मुताबिक, इस बीच जेएनयू में आईसा के दो कार्यकर्ताओं राज सिंह और उत्कर्ष भारद्वाज ने आरोप लगाया कि शाम लगभग पांच बजकर 20 मिनट पर जब वह कला संकाय की ओर से लौट रहे थे तब एबीवीपी के कथित कार्यकर्ता प्रशांत मिश्रा और उसके दोस्तों ने उनका पीछा किया और गला दबाया।
उत्कर्ष और राज ने दावा किया कि श्रीगुरू तेगबहादुर खालसा कॉलेज के निकट सात से आठ लोगों ने उन पर हमला किया और बेल्ट से उनका गला दबाया। पुलिस ने बताया कि प्रशांत और विनायक शर्मा को घटनास्थल से गिरफ्तार कर लिया गया है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 323, 341, 34 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस इसमें शामिल अन्य छात्रों की पहचान करने की कोशिश कर रही है। रामजस कॉलेज में पिछले हफ्ते एआईएसए और एबीवीपी के सदस्य आपस में भिड़ गए थे। विवाद की जड़ विरोध की संस्कृति शीषर्क वाले एक संगोष्ठी को संबोधित करने के लिए जेएनयू के छात्रों उमर खालिद और शहला राशिद को आमंत्रित किया जाना था। एबीवीपी उन्हें बुलाए जाने का विरोध कर रहा था जिसकी वजह से कॉलेज प्रशासन ने इसे वापस ले लिया था।
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