|
|
अमेरिका के ट्रंप प्रशासन के नए आदेश के तहत पश्चिम एशिया और अफ्रीका के आठ मुस्लिम बहुल देशों से अमेरिका आने वाले यात्री लैपटॉप, आईपैड, कैमरे और ज्यादातर बड़े इलेक्ट्रॉनिक सामान अपने साथ विमान के भीतर केबिन बैगेज में नहीं ले जा सकेंगे |
इस आदेश का 10 बड़े हवाई अड्डों से आने वाली 50 से अधिक उड़ानों पर असर होगा | इनमें दुबई जैसे हवाईअड्डे भी शामिल हैं | एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि इस प्रतिबंध से कुल नौ विमानन कंपनियां प्रभावित होंगी | सीएनएन ने खबर दी है कि इस आदेश से एमिरेट्स एयरलाइन, कतर एयरवेज और टर्किश एयरलाइंस जैसी बडी विमानन कंपनियां प्रभावित होंगी | इस प्रतिबंध के जद में काहिरा (मिस्र), दुबई और अूबधाबी (यूएई), इस्तांबुल (तर्की) दोहा (कतर), अम्मान (जॉर्डन), कुवैत सिटी (कुवैत), कासाब्लांका (मोरक्को) और जेद्दा एवं रियाद (सउदी अरब) के हवाई अड्डे आएंगे |
अधिकारियों का कहना है कि अमेरिकी विमानन कंपनियों पर इस प्रतिबंध का असर नहीं होगा क्योंकि कोई भी कंपनी इन हवाई अड्डों से उड़ानें संचालित नहीं करती हैं | यह प्रतिबंध वाशिंगटन में इस्लामिक स्टेट के खिलाफ अमेरिका के नेतृत्व वाले गठबंधन की कल होने वाली बैठक से ठीक पहले शुरू होगा | इस बैठक में अरब देशों के कई शीर्ष अधिकारियों के भाग लेने की संभावना है | रॉयल जॉर्डनियन एयरलाइंस ने कहा कि सेलफोन और चिकित्सा यंत्र इस प्रतिबंध के दायरे से बाहर हैं | एयरलाइंस ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक सामानों पर लगे प्रतिबंध से न्यूयॉर्क, शिकागो, डेट्राइट और मॉन्ट्रियल जाने वाली उसकी उड़ानें प्रभावित होंगी | गृह सुरक्षा विभाग के प्रवक्ता डेविड लापान ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
अमेरिकी सरकार के एक अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर बताया कि इस तरह के प्रतिबंध लगाये जाने पर कई सप्ताह से विचार किया जा रहा था | रैंड कोरपोरेशन में विमानन सुरक्षा विशेषज्ञ ब्रायन जेनकिंस ने कहा कि सुरक्षा के तहत उठाये गए | इस कदम से यह संकेत मिलता है कि संभावित खतरे की खुफिया सूचना के बाद इसे लागू किया गया है | उन्होंने कहा कि इसके पीछे यात्रियों की अपर्याप्त जांच और कुछ देशों में हवाईअड्डे या एयरलाइन कर्मचारियों की मिलीभगत से साजिश रचने की चिंता भी हो सकती है |
JENEWS.in से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर लाइक कर ज्वॉइन करें, और ट्विटर पर फॉलो करे...
|