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नौ गोलियां खाकर और कोमा में रहने के बाद ठीक होकर घर लौटा CRPF का चीता

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कश्मीर में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ के दौरान 9 गोलियां खा चुके सीआरपीएफ के कमांडर चेतन चीता चमत्कारिक रूप से बच गए और लगभग दो महीने बाद आज उन्हें एम्स से छुट्टी दे दी गई | वे अपने घर पहुंच गए हैं | चीता को श्रीनगर से हवाई जहाज से यहां 14 फरवरी को लाया गया और एम्स में भर्ती कराया गया | उनका इलाज कर रहे डॉक्टरों ने कहा कि गहन चिकित्सा के दौरान वह काफी प्रतिबद्ध दिखे जो करीब दो महीने तक चली | लगभग दो महीने बाद आज उन्हें एम्स से छुट्टी दे दी गई | वे घर पहुंच गए हैं |
 
एम्स में ट्रॉमा सर्जरी के प्रोफेसर सुबोध कुमार ने संवाददाताओं के साथ बातचीत में कहा कि यह चमत्कार से कम नहीं है | एम्स ट्रॉमा सेंटर के अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक अमित गुप्ता ने कहा, चीता 16 दिनों तक कोमा में रहे | अब वह तंदुरूस्त हैं | गुप्ता ने कहा कि सीआरपीएफ के 45वीं बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर को कश्मीर घाटी में उनके सिर, दाहिनी आंख, पेट, दोनों हाथ और शरीर के पिछले हिस्से में गोलियां लगी थीं | डॉक्टरों के मुताबिक चीता की दाहिनी आंख की रोशनी लौटने की उम्मीद कम है जबकि उनकी बायीं आंख में भी र्छे लगे थे और बायीं आंख की रोशनी ठीक हो गई है | गुप्ता ने कहा, जब उन्हें लाया गया तो वह कोमा में थे | उनके सिर में गोली लगी थी, उनका शरीर बुरी तरह क्षतिग्रस्त था और उनकी दाहिनी आंख फूटी हुई थी | गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने अधिकारी के साहस की ट्विटर पर प्रशंसा की और कहा कि वह चीता को वापसी करते देखना चाहते हैं | मंत्री ने कहा, किस्मत बहादुर लोगों का साथ देती है | काफी खुश हूं कि चीता के स्वास्थ्य में चमत्कारिक रूप से सुधार हुआ है | उन्होंने कहा, मैं उन डॉक्टरों को धन्यवाद देता हूं जिन्होंने चेतन चीता को ठीक करने में मदद की | चीता की जल्द वापसी की उम्मीद करता हूं |
 
डॉक्टर जिसमें फिर से जान फूंकने के लिए अपने कर्तव्य के तहत जी जान से जुटे थे उन्हीं सीआरपीएफ कमांडेंट चेतन चीता के बगल में इस अटल भरोसे के साथ उनकी पत्नी उमा सिंह खड़ी थीं कि चीता मौत के खिलाफ अपनी ये जंग जरूर जीतेंगे | नौ गोलियां लगने के बाद भी चीता का बच जाना एम्स ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों के लिये किसी चुनौती से कम नहीं, लेकिन उनकी पत्नी का कहना है कि उन्हें पक्का विश्वास था कि वह जरूर मुकाबला कर लौटेंगे जैसा उन्होंने आतंकवादियों के सामने किया था | सैन्य अफसर की बेटी उमा अपने स्कूल के दिनों से ही चीता को जानती थीं | उन्होंने कहा कि वह एक योद्धा और प्रतिबद्धताओं वाले शख्स हैं | उमा ने कहा, वह एक योद्धा हैं | उन्होंने मौत के साथ यह जंग वैसे ही लड़ी जैसे वह तब लड़ते थे जब वर्दी पहनकर आतंकवादियों और उग्रवादियों के खिलाफ उतरते थे | मुझे पूरा विश्वास था कि वह इस जंग में भी विजयी होंगे जैसा हमेशा अपने कर्तव्य पथ पर रहते हैं| अस्पताल के कर्मचारी जब चीता की अस्पताल से छुट्टी की औपचारिकतायें पूरी कर रहे थे तब उमा याद कर रही थीं जब उनके पति गंभीर रूप से घायल हुये थे | वह श्रीनगर एयरपोर्ट से एयर एंबुलेंस में एम्स लाते वक्त उनके साथ थीं | दो बच्चों की मां उमा ने कहा, उनकी आंखें बंद थीं, वह पूरी तरह बेहोश थे लेकिन जिस समय मैंने उनकी सांस चलती हुई देखी, मैं जान गई कि वो ये जंग जरूर जीत लेंगे |
 
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