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श्रीसंत से नहीं हटेगा लाइफ़टाइम बैन, बीसीसीआई ने खारिज की तेज़ गेंदबाज़ की अपील

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आजीवन प्रतिबंध की समीक्षा की दागी तेज गेंदबाज एस श्रीसंत की अपील को बीसीसीआई ने खारिज कर दिया है जिसका कहना है कि वह भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति से कोई समझौता नहीं करेगा|
 
बीसीसीआई ने श्रीसंत को पत्र लिखकर अपने फैसले की सूचना दी है| इस क्रिकेटर ने 2013 स्पॉट फिक्सिंग प्रकरण में अपने ऊपर लगा प्रतिबंध हटाने के लिए प्रशासकों की समिति (सीओए) से अपील की थी जिसके बाद बीसीसीआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राहुल जोहरी ने यह पत्र भेजा है|
 
बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, बीसीसीआई ने उसे सूचित किया है कि उसका आजीवन प्रतिबंध बरकरार रहेगा और उसे प्रतिस्पर्धी क्रिकेट के किसी प्रारूप में खेलने की स्वीकृति नहीं होगी| उसने केरल में स्थानीय अदालत में भी अपील की है और हमारे वकील जवाब देंगे|
 
सूत्र ने कहा, बीसीसीआई ने भ्रष्ट गतिविधियों के खिलाफ हमेशा शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई है| किसी भी अदालत ने श्रीसंत को फिक्सिंग के आरोपों से मुक्त नहीं किया है| यह अंडरवर्ल्ड के साथ उसके संबंधों के आरोप थे जिन्हें निचली अदालत ने खारिज किया है| यह स्पष्ट कर दिया गया है कि ब्रिटेन में क्लब क्रिकेट खेलने की इच्छा रखने वाले श्रीसंत को स्वीकृति नहीं मिलेगी और बीसीसीआई ने उनके मामले को बंद कर दिया है|
 
श्रीसंत की याचिका के जवाब में सोमवार (17 अप्रैल) को बीसीसीआई ने केरल उच्च न्यायालय के समक्ष हलफनामा दायर किया था जिसमें उन्होंने दिल्ली की अदालत द्वारा आरोप मुक्त किए जाने के बावजूद बीसीसीआई के आजीवन प्रतिबंध नहीं हटाने को चुनौती दी थी|
 
बीसीसीआई ने हलफमाने में कहा, सत्र अदालत के याचिकाकर्ता को आपराधिक आरोपों से बरी करने के फैसले का यचिकाकर्ता को बीसीसीआई या उससे मान्यता प्राप्त इकाइयों द्वारा आयोजित क्रिकेट टूर्नामेंटों में खेलने से प्रतिबंधित करने के बीसीसीआई की आंतरिक अनुशासन समिति के फैसले पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा|
 
बोर्ड ने कहा कि सत्र अदालत के समक्ष सवाल यह था कि क्या याचिकाकर्ता (और अन्य आरोपी) संबंधित आपराधिक धाराओं के तहत दंड संहिता के तहत दोषी हैं| दूसरी तरफ बोर्ड ने कहा कि बीसीसीआई की अनुशासन समिति के समक्ष सवाल यह था कि क्या याचिकाकर्ता मैच फिक्सिंग, भ्रष्टाचार और सट्टेबाजी और बीसीसीआई के आंतरिक अनुशासन नियमों के उल्लंघन का दोषी है या नहीं| बोर्ड ने कहा कि दंड संहिता के अंतर्गत सबूतों का स्तर अनुशासन जांच के लिए जरूरी सबूतों से कहीं अधिक होता है|


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