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हाल के विधानसभा चुनावों में गैर भाजपाई दलों (कांग्रेस, सपा, बसपा) के कमजोर प्रदर्शन के बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से गुरुवार को मुलाकात की| जेडीयू सूत्रों के मुताबिक, करीब 45 मिनट तक दोनो नेताओं की गुफ्तगू में नीतीश ने कहा कि भाजपा और केंद्र की मोदी सरकार से लड़ने के लिए विपक्षी दलों को लामबंद होना पड़ेगा|
सोनिया गांधी हाल ही में अपना इलाज कराने के बाद अमेरिका से लौटी हैं और उनके दिल्ली स्थित 10 जनपथ पर दोनों नेताओं की मुलाकात हुई| इस मुलाकात पर जेडीयू ने कहा है कि यह काफी समय से लंबित शिष्टाचार भेंट थी| लेकिन सूत्र इस मुलाकात को जेडीयू प्रमुख की भाजपा के खिलाफ 2019 के आम चुनावों में महागठबंधन के प्रयासों के समीकरण के रूप में देख रहे हैं|
सूत्र बताते हैं कि नीतीश और सोनिया की इस मुलाकात में राष्ट्रपति चुनाव पर भी बातचीत हुई जिसमें कहा गया कि सभी विपक्षी दलों को मिलकर राष्ट्रपति के लिए एक उम्मीदवार उतारना चाहिए| हालांकि, इस बात से जेडीयू प्रवक्ता केसी त्यागी ने इनकार किया है| उन्होंने कहा कि पार्टी का ये मानना है कि देशहित में विपक्षी दलों के नेताओं को एकजुटता दिखानी चाहिए|
लेकिन त्यागी ने ये जरूर कहा कि देश के सबसे बड़े संवैधानिक पद पर होने वाले चुनाव के लिए विपक्ष का एक साझा उम्मीदवार होना चाहिए| सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी की नेता होने के नाते सोनिया गांधी को इसका नेतृत्व करना चाहिए| नीतीश कुमार ने इस बारे में वाम दलों के नेताओं से भी बात की है|
उल्लेखनीय है कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में जदयू, राजद और कांग्रेस ने बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन बनाकर भाजपा को मात दी थी| अब राष्ट्रीय स्तर पर महागठबंधन की इस तरह की सुगबुगाहट दलों के भीतर उठने लगी है| नीतीश की सोनिया से मुलाकात को भी इस संदर्भ में देखा जा रहा है|
वैसे भी नीतीश कुमार राष्ट्रीय स्तर पर पीएम नरेंद्र मोदी से मुकाबला करने के लिए धर्मनिरपेक्ष दलों के महागठबंधन के लिए आह्वान करते रहे हैं, जैसा कि बिहार चुनाव से पहले किया गया था|
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