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चारा घोटाला: लालू यादव को सुप्रीम कोर्ट से झटका, चलेगा आपराधिक साजिश का केस

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चारा घोटाले में राष्ट्रीय जनता दल के मुखिया लालू यादव को बड़ा झटका लगा है| सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई की अपील को मंजूरी दे दी है जिससे लालू यादव की मुसीबतें बढ़ गई है| सीबीआई ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी जिसपर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया| 
 
चारा घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने लालू यादव के खिलाफ केस चलाने की इजाजत दे दी है| सीबीआई ने लालू यादव पर केस चलाने की मांग की थी जिसे सुप्रीम कोर्ट ने मान लिया है और अब लालू यादव के खिलाफ चारा घोटाले में मुकदमा चलेगा| सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की दलील मानते हुए केस चलाने की इजाजत दे दी है|
 
आपको बता दे वर्ष 1996 में सामने आए इस मामले में लालू यादव के अलावा कुल 47 आरोपी थे लेकिन लंबे समय से चल रही अदालती कार्यवाही के दौरान 15 आरोपियों की मौत हो गई जबकि सीबीआई ने दो आरोपियों को सरकारी गवाह बना लिया है| इसी मामले में एक अन्य आरोपी के खिलाफ मामले को झारखंड हाईकोर्ट खारिज कर चुका है| कुल मिलाकर अब दुमका कोषागार से जुड़े इस मामले में केवल 29 आरोपी बचे हैं जिनमें कुछ पूर्व आईएएस अधिकारी भी शामिल हैं| 
 
नब्बे के दशक में बिहार में लालू प्रसाद यादव के मुख्यमंत्री काल में हुए लगभग साढ़े नौ सौ करोड़ रुपये के चारा घोटाले में दुमका कोषागार से तीन करोड़, 31 लाख रुपये फर्जी ढंग से निकालने से जुड़े आरसी 38ए-96 के एक मामले में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को सोमवार (13 जून) को रांची के सीबीआई के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह की अदालत में पेश होना पड़ा था| लालू यादव को पहले ही चारा घोटाला मामले में दोषी ठहराया जा चुका है| उन्हें अक्टूबर 2013 में पांच साल कैद की सजा सुनाई गई थी| वह फिलहाल, जमानत पर बाहर हैं|
 
कांग्रेस के पूर्व नेता जगन्नाथ मिश्रा इस समय जद(एकी) के साथ हैं| उनके खिलाफ दर्ज चारा घोटाले से जुड़े पांच मामलों में से एक मामले में 2013 में उन्हें निचली अदालत ने दोषी करार दिया था| सीबीआइ का दावा है कि हालांकि ये मामले चारा घोटाले से ही निकले हैं लेकिन इनकी प्रकृति भिन्न-भिन्न है क्योंकि इसमें अलग-अलग कोषों की अलग-अलग राशियां शामिल थीं|
 
लालू यादव के खिलाफ इस समय रांची की विशेष अदालतों में चारा घोटाले से जुड़े चार मामले चल रहे हैं, जबकि इससे पहले चारा घोटाले से ही जुड़े आरसी 20ए-96 मामले में लालू यादव को वर्ष 2013 में 30 सितंबर को सीबीआई की प्रवास कुमार सिंह की विशेष अदालत ने दोषी ठहराया था और न्यायिक हिरासत में यहां बिरसामुंडा जेल भेज दिया था। इसके बाद उसी साल 13 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी। जमानत मिलने के लगभग ढाई माह बाद उन्हें रिहा कर दिया गया था। चारा घोटाले के इसी मामले में दोषी करार दिये जाने और चार वर्ष के कैद की सजा सुनाये जाने के बाद लालू के राजनीतिक जीवन पर ग्रहण लग गया था और उनकी सांसदी छिन गयी थी।


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