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मेजर गोगोई ने कहा: सुरक्षा के लिए पत्थरबाज़ को जीप से बांधा, 1200 लोगों ने घेर रखा था मतदान केंद्र

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विवादों से घिरे भारतीय थलसेना के मेजर लीतुल गोगोई मंगलवार (23 मई) को मीडिया के सामने आए और कहा कि पिछले महीने पत्थरबाजी से बचने के लिए एक शख्स को जीप में बांधकर मानव कवच के तौर पर इस्तेमाल करने के उनके कदम से कई लोगों की जान बच पाई| राष्ट्रीय टीवी पर सामने आकर मेजर गोगोई ने अपने कदम का बचाव किया| किसी मेजर रैंक के अधिकारी का मीडिया के सामने आकर इस तरह अपना पक्ष रखने का वाकया कभी-कभार ही होता है| सरकार ने भी गोगोई का बचाव किया|
 
केंद्रीय मंत्री एम वेंकैया नायडू ने कहा कि उन्होंने अपवादजनक परिस्थितियों में कई लोगों की जान बचाई| इस बीच, गोगोई ने जिस शख्स को थलसेना की जीप से बांधा था और जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, उसने सवाल किया कि क्या किसी शख्स को कई किलोमीटर तक बांध कर खींचना बहादुरी का काम है कि अधिकारी को इसके लिए सम्मानित किया गया|
 
अपनी चुप्पी तोड़ते हुए गोगोई ने कहा कि नौ अप्रैल को बडगाम जिले के उटलीगाम में एक मतदान केंद्र में सुरक्षाकर्मियों के एक छोटे से समूह को करीब 1200 पत्थरबाजों ने घेर लिया था और यदि उन्होंने फायरिंग का आदेश दिया होता तो कम से कम 12 जानें जातीं| सोमवार (22 मई) को थलसेना अध्यक्ष की ओर से सम्मानित किए गए गोगोई ने कहा कि भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के कुछ जवानों और कुछ मतदान कर्मियों को जब करीब 1200 पत्थरबाजों ने घेर लिया और संकट में होने की सूचना दी तो वह और पांच अन्य थलसैनिक उस मतदान केंद्र पर गए थे| उन्होंने कहा कि भीड़ में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे और वे मतदान केंद्र को आग के हवाले करने की धमकी दे रहे थे| गोगोई ने कहा कि भीड़ के बीच उन्होंने एक ऐसे शख्स को देखा जो अगुवा जैसा लग रहा था, क्योंकि वह उटलीगाम में पत्थरबाजों को उकसा रहा था|
 
सैन्य अधिकारी ने कहा कि फारूक अहमद डार नाम के शख्स को जीप के बोनट से बांधने का विचार उनके दिमाग में अचानक कौंधा ताकि मतदान कर्मियों और अर्धसैनिक बल के जवानों को वहां से सुरक्षित बाहर निकाला जा सके और किसी को किसी तरह का नुकसान भी नहीं हो| उन्होंने कहा कि डार को जीप से बांधे जाने के बाद कुछ देर के लिए पत्थरबाजी थम गई और इससे मतदान कर्मियों और अर्धसैनिक बल के जवानों को सुरक्षित निकलने का मौका मिल गया|
 
बडगाम जिले में अपने बीरवाह कैंप में पत्रकारों से बातचीत में घटना की विस्तार से जानकारी देते हुए गोगोई ने पत्रकारों को बताया, मैंने सिर्फ स्थानीय लोगों को बचाने की खातिर ऐसा किया| यदि मैंने गोली चलाई होती तो 12 से ज्यादा जानें जाती| इस विचार के साथ मैंने कई लोगों की जिंदगी बचाई| जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कहा कि मामले की जांच जारी है, क्योंकि प्राथमिकी निरस्त नहीं की गई है| थलसेना की कोर्ट ऑफ एन्क्वायरी भी चल रही है| पुलिस महानिरीक्षक (कश्मीर) मुनीर खान ने कहा, जांच की जाएगी और नतीजा साझा किया जाएगा|
 
बहरहाल, डार इससे खुश नहीं हैं| जांच के बारे में उन्होंने कहा, यह पूरी तरह छलावा है| डार ने कहा, वे कभी गंभीर नहीं थे| मैं एक छोटा आदमी हूं और कोई मेरा ख्याल क्यों रखेगा? शॉल पर कढ़ाई का काम करने वाले कारीगर फारूक अहमद डार ने कहा कि वह पथराव करने वाला नहीं बल्कि एक छोटा आदमी है और वह केवल वोट देने के लिए घर से बाहर गया था||
 
डार ने कहा, अगर ऐसा होता तो वे मुझे पुलिस को सौंप देते| उसने कहा कि संबंधित मेजर को प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किए जाने के बारे में जानकर उसे ताज्जुब हुआ| उसने याद किया कि वह नौ अप्रैल को श्रीनगर लोकसभा उपचुनाव के लिए मतदान करने के बाद अपने एक रिश्तेदार की शोकसभा में हिस्सा लेने जा रहा था और रयार गांव के पास मेजर ने उसे उठा लिया और उसका इस्तेमाल कश्मीर में पथराव करने वालों के खिलाफ मानव कवच के रूप में किया|
 
डार ने बताया, रयार में सेना के 13 राष्ट्रीय राइफल के शिविर के सामने छोड़े जाने से पहले मुझे कई गांवों में घुमाया गया था| मेजर ने हालांकि मीडिया के समक्ष दावा किया कि डार को सैनिकों ने पथराव करते समय पकड़ा था| इस बीच, वैश्विक मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने गोगोई को सम्मानित करने के थलसेना के फैसले की आलोचना की|


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