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94 साल के मुथूवेल करुणानिधि, जन्मदिन समारोह में आज एक सूत्र में बंधेगा विपक्ष

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भारतीय राजनीति के कद्दावर नेता और द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (डीएमके) के प्रमुख मुथूवेल करुणानिधि आज 94 साल के हो गए हैं| इस मौके पर आज चेन्नै में कांग्रेस समेत तमाम गैर एनडीए दल के नेता विपक्षी एकजुटता दिखाएंगे| राष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले चेन्नै में विपक्षी दलों के नेताओं की एकजुटता का समारोह भारतीय राजनीति के लिए कई मायनों में अहम माना जा रहा है| कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने करुणानिधि को 94वें जन्मदिन की बधाई दी है| राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने भी दक्षिण भारत की राजनीति के कद्दावर नेता करुणानिधि को जन्मदिन पर बधाई संदेश भेजे हैं|
 
एम. करुणानिधि के बेटे और डीएमके के कार्यकारी अध्यक्ष एमके स्टालिन इस आयोजन का जिम्मा संभाल रहे हैं| बताया जाता है कि उन्होंने सभी दलों के नेताओं को खुद ही न्यौता दिया है| कार्यक्रम में पहुंचने वाले प्रमुख नेताओं में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, जेडीयू नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, एनसीपी प्रमुख शरद पवार, नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला, माकपा नेता सीताराम येचुरी, सीपीआई के डी. राजा, टीएमसी से डेरेक ओ ब्रायन, पुडुचेरी के मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी, आईयूएमएल के के.एम. कादिर मोहिदीन शामिल हैं|
 
डीएमके चीफ और अपने पिता एम.करुणानिधि का मान बढ़ाने के लिए स्टालिन ने कहा, "ऐसे समय जब वह स्वास्थ्य कारणों से आराम कर रहे हैं, उनके आदर्शों को पूरा करना उनको जन्मदिन का सबसे बड़ा तोहफा होगा|" उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से आह्वान किया, आइए! 3 जून को बड़ी संख्या में एकत्र होकर इस अवसर को भारतीय राजनीति में निर्णायक मोड़ बनाया जाए| आइए! तमिलनाडु की राजधानी को काले और लाल (डीएमके का झंडा) रंग के समुद्र में बदल दिया जाए और इसकी गूंज नई दिल्ली तक पहुंचे|
 
करुणानिधि राज्य की द्रविड़वादी पार्टी, द्रविड़ मुनेत्र कझगम (डीएमके) के अध्यक्ष हैं| पार्टी के संस्थापक सीएन अन्नादुराई की मौत के बाद पार्टी प्रमुख बने| अपने अब तक के राजनीतिक जीवन में करुणानिधि ने कभी भी हार का मुंह नहीं देखा| छात्र राजनीति से राजनीति में प्रवेश करने वाले करुणानिधि ने हिन्दी विरोधी आंदोलनों में भाग लिया| उन्होंने द्रविड़ राजनीति का एक छात्र संगठन भी बनाया| अपने सहयोगियों के लिए उन्होंने मुरासोली नाम के एक समाचार पत्र का प्रकाशन किया, जो आज भी चल रहा है|
 
1957 में करुणानिधि पहली बार तमिलनाडु विधानसभा के विधायक बने और बाद में 1967 में वे सत्ता में आए और उन्हें लोक निर्माण मंत्री बनाया गया| 1969 में अन्ना दुराई के निधन के बाद वे राज्य के मुख्यमंत्री बने| 5 बार मुख्यमंत्री और 12 बार विधानसभा सदस्य रहने के साथ-साथ वे राज्य में अब समाप्त हो चुकी विधान परिषद के भी सदस्य रह चुके हैं| एक सफल राजनेता, सफल मुख्यमंत्री, फिल्म लेखक, साहित्यकार होने के साथ ही करुणानिधि एक पत्रकार, प्रकाशक और कार्टूनिस्ट भी रहे हैं| 
 
मुथूवेल करुणानिधि का जन्म 3 जून 1924 को तिरुवरूर के तिरुकुवालाई में हुआ था| पिता मुथूवेल तथा माता अंजुगम थीं| करुणानिधि की तीन शादी हुई| तीन पत्नियों में से पद्‍मावती का निधन हो चुका है, जबकि दयालु और रजती जीवित हैं| उनके 4 बेटे और 2 बेटियां हैं| बेटों के नाम एमके मुथू, जिन्हें पद्मावती ने जन्म दिया था, जबकि एमके अलागिरी, एमके स्टालिन, एमके तमिलरासू और बेटी सेल्वी दयालु अम्मल की संतानें हैं| दूसरी बेटी कनिमोझी तीसरी पत्नी रजति से हैं| करुणानिधि अपना घर दान कर चुके हैं| उनकी इच्छानुसार उनकी मौत के बाद इसे गरीबों के लिए एक अस्पताल में बदल दिया जाएगा| करुणानिधि ऐसे राजनीतिज्ञ हैं जो 5 बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रह चुके हैं|


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