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अमेरिका में हंसी के पात्र बने पाक के शीर्ष राजनयिक, चेहरे पर दिखी चिड़चिड़ाहट

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पाकिस्तान के शीर्ष राजनयिक को गुरुवार को उस समय वाशिंगटन में श्रोताओं की हंसी का पात्र बनना पड़ा, जब वह बार-बार इस बात पर जोर दे रहे थे कि पाकिस्तान में आतंकवादियों के लिए कोई सुरक्षित पनाहगाह नहीं है और कथित तौर पर कराची के अस्पताल में मरने वाला तालिबानी नेता कभी अफगानिस्तान से बाहर ही नहीं गया|
 
श्रोताओं के हंसने पर अमेरिका में पाकिस्तानी राजदूत ऐजाज अहमद चौधरी के चेहरे पर चिड़चिड़ाहट साफ देखी जा सकती थी| उन्होंने कहा, "इसमें हंसने वाली क्या बात है?" पाकिस्तान में कोई आतंकी पनाहगाह न होने और मुल्ला उमर द्वारा कभी भी अफगानिस्तान से पाकिस्तान न जाने का दावा करने वाले ऐजाज की इन बातों को सुनकर वाशिंगटन थिंकटैंक के लोग हंसने लगे थे| अफगानिस्तान, इराक और संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत के रूप में काम कर चुके पूर्व अमेरिकी राजनयिक जाल्मे खलीलजाद ने कहा कि सच्चाई इससे अलग है|
 
उन्होंने कहा, "हमारे पास पाकिस्तान में उसकी (मुल्ला उमर) की मौजूदगी के पुख्ता सबूत हैं| हमारे पास सबूत हैं कि वहां वह कहां रहा, कहां गया| अस्पताल आदि|" उन्होंने कहा कि लंबे समय तक यह भी कहा जा रहा था कि बिन लादेन कभी अफगानिस्तान से बाहर नहीं गया| उन्होंने अफगानिस्तान में अमेरिकी रणनीति पर क्षेत्रीय दृष्टिकोणों के मुद्दे पर चर्चा के दौरान कहा, "इस बात के पर्याप्त साक्ष्य हैं कि जब हक्कानी नेटवर्क पर ऑपरेशन चल रहा था, तब उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाया जा रहा था| यह चर्चा अटलांटिक काउंसिल के साउथ एशिया सेंटर में हो रही थी|
 
चर्चा के दौरान ऐजाज अकेले पड़ते दिखे क्योंकि पैनल के दो अन्य सदस्य- भारत के पूर्व मंत्री मनीष तिवारी और शीर्ष अमेरिकी थिंकटैंक विशेषज्ञ एश्ले टेलिस भी खलीलजाद की बात से सहमत दिखे कि पाकिस्तान में आज भी आतंकवाद की शरणस्थली है और पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठान की ओर से उन्हें सहयोग मिलता है|
 
ऐजाज और खलीलजाद के बीच हुई तीखी बहस के गवाह बने लोग चर्चा के दौरान हंसने लगे| इन हंसते हुए लोगों से ऐजाज ने पूछा, "आप कौन सी पनाहगाहों की बात कर रहे हैं? यदि आप अतीत में जीना चाहते हैं तो वर्तमान को सुलझा नहीं सकते| हक्कानी और तालिबान हमारे दोस्त नहीं हैं| वे हमारे मुखौटा संगठन नहीं हैं| आप किस क्वेटा शूरा की बात कर रहे हैं? कौन सी पेशावर शूरा?" यह चर्चा अचानक ही बिना किसी निष्कर्ष के समाप्त हो गई| टेलिस ने कहा कि पाकिस्तान में आतंक की पनाहगाह अब भी मौजूद हैं और धन और लड़ाकों की भारी आपूर्ति अफगानिस्तान से होती है| लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि तालिबानी नेतृत्व पाकिस्तान में है|
 
वही मनीष तिवारी ने कहा कि पाकिस्तान को अब यह आत्मावलोकन करना चाहिए कि पाकिस्तानी सैन्य प्रमुख से मिलने रावलपिंडी गए अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी आखिर क्यों पाकिस्तान के खिलाफ हो गए| दरअसल गनी यह कहने के लिए मजबूर हो चुके हैं कि पाकिस्तान अफगानिस्तान के खिलाफ एक अघोषित युद्ध लड़ रहा है| उन्होंने कहा, "राष्ट्र प्रमुख की ओर से आने वाले ये बेहद कड़े बयान हैं|" सवाल-जवाब के सत्र के दौरान एक अफगान राजनयिक मुहम्मद असद और एक अफगान महिला पत्रकार नाजिरा करीमी पैनल के तीन अन्य सदस्यों के साथ शामिल हो गए| इन दोनों ने भी आतंकवादियों की पनाहगाह के बारे में ऐजाज के दावे को चुनौती दी|
 
उन्होंने कहा, "अफगान धरती का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ नहीं किया जाना चाहिए| इसके अलावा हम मैत्री को बढ़ावा देना चाहते हैं| हर समय पाकिस्तान पर दोष मढ़ने से फायदा नहीं होगा| फायदा इस बात से होगा कि आप पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान के लिए किए गए काम को मान्यता दें|" चौधरी ने भारत पर भी दोहरे दबाव की रणनीति का हिस्सा होने का आरोप लगाया|
 
उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में भारत का एक रणनीतिक हित है| उन्होंने आरोप लगाया कि यह इस्लामाबाद के खिलाफ नयी दिल्ली की दोहरे दबाव की रणनीति का हिस्सा है| उन्होंने आरोप लगाया कि भारत इस क्षेत्र में आधिपत्य स्थापित करने की कोशिश कर रहा है|


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