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देश के राष्ट्रपति चुनाव के लिए NDA प्रत्याशी के नाम की घोषणा को लोगों को बेसब्री से इंतज़ार था और इसका इंतज़ार जहां लोगों को तो था वहीं विपक्ष भी मोदी सरकार के पत्ते खुलने का इंतज़ार कर रहा था| बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद को राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (NDA) के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में घोषित किया|
कानपुर के रहने वाले और दलित नेता रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति पद के लिए बीजेपी की पसंद बने तो लोगों के साथ राजनैतिक हल्के ने भी इसपर अपने नज़रिये और पार्टी के स्टैंड के हिसाब से व्याख्या की| दरअसल बीजेपी के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर आम सहमति बनाने की कोशिश में जुटी हुई है, वहीं विपक्ष में भी राष्ट्रपति पद प्रत्याशी को लेकर आपसी सहमति नहीं बनती दिख रही है|
ऐसे में NDA प्रत्याशी के रुप में बीजेपी ने रामनाथ कोविद के नाम पर मुहर लगाकर विपक्ष को सकते में डाल दिया है| रामनाथ कोविद दलित समुदाय से ताल्लुक रखते हैं और भारत में दलित समुदाय को लेकर राजनैतिक दलों की निष्ठा किसी से छिपी नहीं है| ऐसे में राष्ट्रपति चुनाव में NDA प्रत्याशी रामनाथ कोविंद के खिलाफ विपक्ष संयुक्त उम्मीदवार उतार सकता है|
गैर राजग दलों के 22 जून को इस मुद्दे पर चर्चा के लिये बैठक करने की उम्मीद है| मीडिया सूत्रों की मानें तो पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुशील कुमार शिंदे और डॉ. बी आर अंबेडकर के पौत्र प्रकाश यशवंत अंबेडकर, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पौत्र और सेवानिवृत्त नौकरशाह गोपालकृष्ण गांधी और कुछ अन्य नामों पर विपक्षी पार्टियां विचार कर रही हैं|
NDA की तरफ से राष्ट्रपति पद के लिए बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद को उम्मीदवार बनाए जाने के ऐलान के बाद विपक्ष ने आमराय बनाने की बीजेपी की कवायद पर सवाल उठाया है| कांग्रेस ने कहा कि बीजेपी ने एकतरफा फैसला करते हुए कैंडिडेट के नाम का ऐलान किया है| उन्होंने कहा कि कैंडिडेट के नाम पर फैसला लेने के बाद कैसे आम राय बनेगी| आजाद ने कहा कि बीजेपी ने हमें पहले नाम नहीं बताया|
कांग्रेस ने रामनाथ कोविंद को समर्थन देने या विपक्ष की तरफ से संयुक्त उम्मीदवार उतारे जाने को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले| कांग्रेस ने कहा कि विपक्ष के साथ चर्चा के बाद वह आगे का फैसला लेगी| वहीं, सीपीएम ने विपक्ष की तरफ से भी उम्मीदवार खड़े करने के स्पष्ट संकेत दिए हैं| सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि रामनाथ कोविंद आरएसएस शाखा के प्रमुख रहे हैं और उन्हें राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाना सीधे-सीधे टकराव की राजनीति है|
वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी चीफ ममता बनर्जी ने रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाए जाने के एनडीए के फैसले पर हैरानी जताई है| उन्होंने कहा कि समर्थन देने से पहले उन्हें कोविंद के बारे में जानना होगा| ममता ने कहा कि प्रणव मुखर्जी, लालकृष्ण आडवाणी और सुषमा स्वराज जैसे कद के किसी नेता को चुनना चाहिए था, कोविंद को उम्मीदवार बनाने की क्या जरूरत थी| उन्होंने कहा कि 22 जून को विपक्ष की बैठक में राष्ट्रपति उम्मीदवार को लेकर फैसला होगा| वहीं, टीएमसी के ही डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि कोविंद के बारे में जानने के लिए उन्हें विकिपिडिया का सहारा लेना पड़ा|
मायावती ने कहा है कि रामनाथ कोविंद को संघ से जुड़े होने की वजह से NDA ने राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया है| उन्होंने कहा कि अच्छा होता की दलित समाज से किसी गैर राजनीतिक व्यक्ति को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया जाता| उन्होंने रामनाथ कोविंद को समर्थन देने की बात पर कोई ठोस जबाव नहीं दिया है| मीडिया की तरफ से पूछे गए सवाल के जबाव में उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी कोविंद की उम्मीदवारी का विरोध नहीं करती, ना ही अभी हम उनका समर्थन कर रही है।
बीएसपी प्रमुख मायावती ने कहा कि कोविंद आरएसएस से जुड़े रहे हैं लिहाजा उनकी पार्टी उनके राजनैतिक पृष्ठभूमि से सहमत नहीं है| मायावती ने कहा कि अगर एनडीए ने गैर राजनीतिक दलित नाम नामित किया होता तो यह बेहतर होता| जेडीयू के वरिष्ठ नेता शरद यादव ने कहा है कि विपक्षी दलों की बैठक में राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार के नाम पर विचार किया जाएगा| उन्होंने कहा कि बैठक में अलग उम्मीदवार खड़ा करने के साथ-साथ कोविंद को समर्थन देने की संभावना पर भी चर्चा होगी|
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता नरेश अग्रवाल ने रामनाथ कोविंद के लिए कहा कि यह ठीक है| हमारे उत्तर प्रदेश के हैं, दलित समुदाय के भी हैं, राजनीतिक बैकग्राउंड से भी है| मैं अभी उनको बधाई दूंगा| लेकिन उनके नाम पर सहमति को लेकर जो निर्णय यूपीए लेगी, समाजवादी पार्टी उसके साथ रहेगी|
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पीएल पुनिया ने कहा कि राष्ट्रपति पद के बारे में कोई भी विवादास्पद टिप्पणी करना सही नहीं है| विपक्षी दलों की बैठक में जो स्टैंड होगा, वह ही कांग्रेस का स्टैंड होगा| उन्होंने कहा कि बीजेपी की जहां भी सरकार है, वहां दलितों पर अत्याचार होता है| ये सिर्फ चिह्नों की राजनीति करते हैं| जहां दलितों का दमन होता है, वह ही बीजेपी का असली चेहरा है|
गौरतलब है कि राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है| 17 जुलाई को मतदान होना है। 20 जुलाई को नतीजा घोषित होगा| वर्तमान राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी का कार्यकाल 24 जुलाई को समाप्त होने जा रहा है|
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