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राजीव गाँधी हत्याकांड के दोषी ने मांगी मर्सी किलिंग, तमिलनाडु सरकार को भेजी अर्जी

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राजीव गांधी हत्या मामले में दोषी करार दिए गए श्रीलंका के रॉबर्ट पायस ने मर्सी किलिंग (दया मृत्यु) की मांग की है। इसके लिए उसने तमिलनाडु सरकार के पास बाकायदा अर्जी भेजी है।
 
खबरों के मुताबिक, पायस ने तमिलनाडु के सीएम के पलानीसामी को एक इमोशनल लेटर लिखा है। लेटर में पायस ने खुद के लिए मर्सी किलिंग की मांग की है। ये भी लिखा कि मरने के बाद उसकी बॉडी फैमिली को सौंप दी जाए। एक जेल अफसर के मुताबिक, पायस ने पुझाल जेल अथॉरिटीज के मार्फत अपनी दरख्वास्त सरकार के पास भेजी है। पायस का ये भी आरोप है कि यूपीए और एनडीए सरकारों ने राजीव की हत्या के सातों दोषियों (पायस समेत) की रिहाई का विरोध किया था। जयललिता ने उनकी रिहाई की कोशिश की थी। 
 
पायस ने कहा, "मुझे समझ में नहीं आता कि हमारी रिहाई क्यों रोक दी गई? जयललिता ने तमिलों की मांग पर राजीव हत्याकांड के दोषियों की रिहाई का फैसला किया था। ये तमिल केवल तमिलनाडु के नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के थे। लेकिन केंद्र सरकार ने फैसला लिया कि हमारी जिंदगी जेल में ही खत्म होगी।अब केंद्र और राज्य सरकार दोनों सरकारें खामोश हैं। उन्हें बताना चाहिए कि क्या हमारी जिंदगी जेल में ही खत्म हो जाएगी। मैं जानता हूं कि दोनों सरकारों की मंशा क्या है। मैं ये भी जान गया हूं कि मेरे जीने का कोई मतलब नहीं है और मेरी रिहाई भी नहीं हो सकती। लंबे वक्त तक जेल में रहना केवल मुझे ही नहीं, बल्कि परिवार को भी सजा देने जैसा है। 11 जून को जेल में मेरे 26 साल पूरे हो गए। अब 27वां साल है। मैं अब मौत चाहता हूं। बीते कई सालों से परिवार का कोई भी मेंबर या रिलेटिव मुझसे जेल में मिलने नहीं आया। मुझे नहीं लगता कि मेरी जिंदगी का कोई मतलब है।1999 में सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस वाधवा ने मुझे दोषी करार नहीं दिया था। लेकिन तब से मैं सजा काट रहा हूं।"
 
राजीव गांधी की 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में चुनावी सभा के दौरान एक सुसाइड बम हमले में मौत हो गई थी। LTTE ने इसकी साजिश रची थी। नलिनी और उसके पति मुरुगन समेत तीन को 28 जनवरी 1998 को राजीव गांधी मर्डर केस में मौत की सजा सुनाई गई थी। तमिलनाडु के गवर्नर ने 24 अप्रैल 2000 को नलिनी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था। प्रियंका गांधी ने भी नलिनी से मुलाकात की थी। 1 मई को सुप्रीम कोर्ट ने हत्याकांड के एक दोषी पेरारिवलन की पिटीशन पर सुनवाई की। पेरारिवलन को इस केस में सजा-ए-मौत सुनाई गई थी, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उम्र कैद में बदल दिया था। 


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