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अमेरिका के एक शीर्ष थिंक टैंक ने कहा है कि ट्रम्प प्रशासन जहां चीनीयों के साथ घनिष्ठता बढ़ा रहा है वहीं दुनिया में चीन के बढ़ते प्रभाव पर अंकुश लगाने के लिये उसे भारत की जरूरत होगी|
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा से पहले अमेरिका के शीर्ष थिंक टैंक अटलांटिक काउंसिल ने अपने नीति पत्र ट्रांसफॉर्मिग इंडिया फ्रॉम ए बैलेंसिंग टू लीडिंग पावर में कहा, "चीन ने आथर्कि एवं सैन्य दोनों मोर्चो पर प्रगति की है, इस बात को देखते हुए अमेरिका को अपना वैश्विक एवं क्षेत्रीय प्रभुत्व सुनिश्चित करने के लिये वहां अपने संसाधन लगाने की आवश्यकता है|"
पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी और साउथ एशिया सेंटर ऑफ द अटलांटिक काउंसिल के निदेशक भारत गोपालस्वामी द्वारा संयुक्त रूप से लिखे गये नीति पत्र में कहा गया है 'ट्रंप ने अब तक चीन के साथ जहां मेल-मिलाप का ही पक्ष लिया है, वहीं भारत-अमेरिका रिश्तों को मजबूत बनाये रखने के लिये वाशिंगटन की तरफ से और पहल और प्रयास किये जाने की जरूरत होगी|
अमेरिका का भारत के प्रति इरादा दिखाने के लिये सिनेटर जॉन मैक्केन द्वारा प्रस्तावित एशिया-प्रशांत स्थायित्व पहल एक प्रभावी तरीका हो सकता है|उन्होंने लिखा कि अगर मंजूरी मिलती है तो प्रस्तावित साढ़े सात अरब अमेरिकी डॉलर की फंडिंग आने वाले सालों में भारत-अमेरिका के संबंधों में शुरुआती बिंदु हो सकता है|
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