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जंगीपुर वो जगह है, जहां से प्रेसिडेंट प्रणब मुखर्जी ने 2004 में पहली बार लोकसभा चुनाव जीता था। शुक्रवार को वे यहां बतौर प्रेसिडेंट आखिरी बार पहुंचे, तो उनकी एक झलक पाने काे लोग बेताब हो उठे। सड़काें और खेतों में लोग मोबाइल फोन से उनकी और उनके काफिले की तस्वीरें ले रहे थे। यहां प्रेसिडेंट ने लोगों से कहा कि अब वो यहां एक आम नागरिक की तरह आएंगे। बता दें कि मुखर्जी का प्रेसिडेंट पोस्ट पर टेन्योर इसी महीने पूरा हो रहा है|
यहां मेकेंजी फुटबॉल ग्राउंट पर केकेएम रूरल फुटबॉल टूर्नामेंट का इनॉगरेशन करते वक्त मुखर्जी ने कहा, अब वे यहां प्रेसिडेंट के तौर पर नहीं आएंगे, क्योंकि 10 दिन बाद उनका टर्म पूरा हो रहा है। प्रेसिडेंट ने जब कहा कि वो देश के 130 करोड़ नागरिकों में से एक होंगे और एक आम नागरिक की तरह वापस आएंगे, इस पर लोगों ने तालियां बजाईं। बता दें कि मुखर्जी ने अपने पिता कमाका किमकर मुखर्जी की याद में केकेएम गोल्ड कप फुटबॉल टूर्नामेंट 2010 में शुरू किया था।
शुक्रवार को इस टूर्नामेंट में मोहन बागान और ईस्ट बंगाल की अंडर-19 टीम के बीच मुकाबला हुआ। एक्स्ट्रा टाइम तक चले इस मैच में मोहान बगान ने पेनाल्टी शूटआउट से जीत दर्ज की। उमसभरे मौसम के बावजूद बतौर प्रेसिडेंट आखिरी बार यहां आए मुखर्जी की एक झलक पाने को लोग बेताब थे। मुखर्जी ने भी लोगों को निराश नहीं किया और लगातार हाथ हिलाकर उनका अभिवादन करते रहे, क्योंकि इन्हीं लोगों ने उन्हें 2004, फिर 2009 में लोकसभा चुनाव जिताया था। मुखर्जी ने 1969 में बतौर राज्यसभा मेंबर सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की थी। इसके बाद वो सरकार के कई अहम पदों पर रहे।
जंगीपुर में उनकी आज की यह यात्रा भावुक कर देने वाली थी। वे यहां अपने बेटे अभिजीत मुखर्जी के बनाए मकान "जंगीपुर हाउस" में लोगों से मिले। 2012 में प्रणब मुखर्जी के प्रेसिडेंट बनने के बाद यहां से अभिजीत ने लोकसभा चुनाव जीता। घर की ओर जाती संकरी सड़कों से जब मुखर्जी का काफिला गुजरा तो धान के खेतों में खड़ी भीड़ में से कई लोगों ने यह पल अपने मोबाइल में कैद कर लिया।
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