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भारत सरकार की महात्वाकांक्षी स्वर्ण मौद्रीकरण योजना के तहत पेश सोने के सिक्के "इंडियन गोल्ड क्वॉयन" को शुद्धता और विश्वसनीयता के कारण उपभोक्ता दूसरे स्वर्ण सिक्कों से अधिक पसंद कर रहे हैं।
कीमती धातुओं का कारोबार करने वाली सरकारी कंपनी एमएमटीसी लिमिटेड तथा विश्व स्वर्ण परिषद द्वारा किये गये अध्ययन में यह बात समाने आयी है। परिषद द्वारा आज जारी रिपोर्ट "इंडियाज गोल्ड इंवेस्टमेंट इवॉल्यूशन, इंडियन गोल्ड क्वॉयन: ऐन इंट्रोडक्शन टू ब्रांडेड गोल्ड क्वॉयंस" में कहा गया है भारतीय स्वर्ण सिक्कों की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। उसने कहा कि सरकार द्वारा प्रायोजित होने की वजह से इसकी शुद्धता, विश्वसनीयता तथा मानक के अनुरूप होना इसका सबसे बड़ा कारण है।
परिषद ने कहा कि त्योहारी मौसम में खासकर दीपावली में उपहार के तौर पर सोने के सिक्के देने के प्रचलन के कारण इसकी बिक्री बढ रही है। ऐसे में बैंकों जैसे विश्वसनीय श्रोत के जरिये बिक्री के लिये उपलब्ध सिक्के उपभोक्ताओं की पसंद बनते जा रहे हैं। उपभोक्ता दो ग्राम, पांच ग्राम और दस ग्राम के सिक्कों को विशेष तरजीह दे रहे हैं। भारतीय स्वर्ण सिक्कों की बिक्री के लिए अभी इंडियन ओवरसीज बैंक, फेडरल बैंक, बिजया बैंक और येस बैंक की चुनिंदा शाखाएं अधिकृत है।
एमएमटीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक वेद प्रकाश ने कहा कि हमने लांचिंग के बाद अबतक 185 किलोग्राम भारतीय स्वर्ण सिक्के बेच चुके हैं। शोध से इसके प्रति उपभोक्ताओं की दिलचस्पी का भी पता चलता है। सरकार द्वारा प्रायोजित होने के कारण इसकी गुणवत्ता विश्वसनीय है। एमएमटीसी के आउटलेटों के अलावा ये सिक्के चार बैंकों की शाखाओं पर भी उपलब्ध हैं।
विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) की एक रिपोर्ट के अनुसार शुद्धता की गारंटी, हॉलमार्क और मानकीकरण से ग्राहकों के बीच भारतीय स्वर्ण सिक्कों की मांग में इजाफा हो सकता है। सर्वेक्षण में शामिल करीब 85 प्रतिशत लोगों का का मानना है कि सरकार का समर्थन इसे और अधिक प्रासंगिक बनाता है। "भारत का स्वर्ण निवेश विकास, भारतीय सोने के सिक्के : ब्रांडेड स्वर्ण सिक्कों का एक परिचय" शीषर्क से जारी रपट के अनुसार करीब 87 प्रतिशत लोगों का मानना है कि शुद्धता की गारंटी उनके लिए सबसे अधिक मायने रखती है। जबकि 85 प्रतिशत मानते हैं कि सरकार का समर्थन और राष्ट्रीय विनिर्माताओं के सिक्के इसे अधिक प्रासंगिक बनाते हैं।
सिक्कों का मानकीकरण और उन पर हॉलमार्क लगाने को भी 84 प्रतिशत प्रासंगिक बताते हैं। यह सर्वेक्षण विभिन्न आर्थिक सामाजिक वर्गों से ताल्लुक रखने वाले 25 से 60 वर्ष की आयु के पेशेवरों, कारोबारियों, महिलाओं और गृहणियों के बीच देश के आठ प्रमुख शहरों में किया गया था। भारतीय सोने के सिक्कों की छह विशिष्ट पहचान हैं। यह 24 कैरट की शुद्धता के, भारतीय मानक ब्यूरो के हॉलमार्क से लैस होते हैं। इनकी पैकिंग गिरने पर नष्ट होने से बचाने वाली होती है। मानकीकरण और वापस खरीद की सुविधा के साथ बाजार में उपलब्ध हैं। इसके अलावा यह पांच से दस ग्राम के आकार में उपलब्ध हैं और इन पर सरकार की निशानी के तौर पर अशोक चक्र अंकित होता है।
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