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मुस्लिम समाज के विभिन्न पंथों के विद्वानों और धर्मगुरुओं ने समान नागरिक संहिता पर विधि आयोग की प्रश्नावली को लेकर विरोध दर्ज कराया। कई मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधि समूह ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस-ए-मुशावरत के बैनर तले मुंबई में मुस्लिम धर्मगुरुओं की बैठक हुई जिसकी अध्यक्षता दारूल उलूम मोहम्मदिया के प्रमुख सैयद मोहम्मद खालिद अशरफ ने की।
इन धर्मगुरुओं ने कहा, "मुस्लिम पर्सनल लॉ में किसी तरह के दखल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। समाज सुधार और लैंगिक न्याय के नाम पर समान नागरिक संहिता को थोपने का कोई भी प्रयास किया गया तो इसके विपरीत परिणाम होंगे।" अशरफ ने कहा, "सरकार को इस पर लगाम लगाने की साजिश रचने की बजाय मुसलमानों के रुख का सम्मान करना चाहिए। सरकार पर्सनल लॉ से जुड़े मामलों में मुसलमानों पर दूसरे समुदायों का अनुसरण करने का दबाव नहीं बना सकती।"
पिछले दिनों विधि आयोग ने एक प्रश्नावली सामने रखी जिसमें समान नागरिक संहिता और तीन तलाक सहित कुछ बिंदुओं पर लोगों की राय मांगी गई है। बीते गुरुवार को ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड तथा कुछ अन्य प्रमुख मुस्लिम संगठनों ने इस प्रश्नावली का बहिष्कार करने का फैसला किया और कहा कि अगर देश में समान नागरिक संहिता को लागू किया गया तो यह सभी को "एक रंग में रंगने" जैसा होगा जो देश के बहुलवाद और विविधता के लिए खतरनाक होगा।
मुस्लिम समाज के विभिन्न पंथों के विद्वानों और धर्मगुरुओं ने समान नागरिक संहिता पर विधि आयोग की प्रश्नावली को लेकर विरोध दर्ज कराया। कई मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधि समूह ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस-ए-मुशावरत के बैनर तले मुंबई में मुस्लिम धर्मगुरुओं की बैठक हुई जिसकी अध्यक्षता दारूल उलूम मोहम्मदिया के प्रमुख सैयद मोहम्मद खालिद अशरफ ने की।
इन धर्मगुरुओं ने कहा, "मुस्लिम पर्सनल लॉ में किसी तरह के दखल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। समाज सुधार और लैंगिक न्याय के नाम पर समान नागरिक संहिता को थोपने का कोई भी प्रयास किया गया तो इसके विपरीत परिणाम होंगे।" अशरफ ने कहा, "सरकार को इस पर लगाम लगाने की साजिश रचने की बजाय मुसलमानों के रुख का सम्मान करना चाहिए। सरकार पर्सनल लॉ से जुड़े मामलों में मुसलमानों पर दूसरे समुदायों का अनुसरण करने का दबाव नहीं बना सकती।"
पिछले दिनों विधि आयोग ने एक प्रश्नावली सामने रखी जिसमें समान नागरिक संहिता और तीन तलाक सहित कुछ बिंदुओं पर लोगों की राय मांगी गई है। बीते गुरुवार को ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड तथा कुछ अन्य प्रमुख मुस्लिम संगठनों ने इस प्रश्नावली का बहिष्कार करने का फैसला किया और कहा कि अगर देश में समान नागरिक संहिता को लागू किया गया तो यह सभी को "एक रंग में रंगने" जैसा होगा जो देश के बहुलवाद और विविधता के लिए खतरनाक होगा।
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