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दीपावली के बाद पहली बार राजधानी धुंध की चादर से लिपटी नजर आई। विशेषज्ञ इस धुंध का प्रमुख कारण प्रदूषण के स्तर में बढ़ोतरी और हवा की गति में कमी को मान रहे हैं। राजधानी की हवा में प्रदूषक तत्व पीएम 2.5 तथा पीएम 10 का स्तर कम नहीं होने के कारण बुधवार को लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सबसे अधिक परेशानी सुबह सैर के लिए निकलने वालों को हुई। हवा में बेंजीन और नाइट्रोजन डाईऑक्साइड का स्तर सामान्य से लगभग दोगुना बढ़ गया।
दिवाली के तीन दिन बाद भी राष्ट्रीय राजधानी एक Сगैस चैंबरТ की तरह नजर आई । प्रदूषकों से लदी धुंध की मोटी चादर में दिल्ली पूरे दिन लिपटी रही, जिससे दिल्ली के लोगों को गंभीर गुणवत्ता वाली हवा में सांस लेने को मजबूर होना पड़ा । पुणे स्थित संस्था सफर ने कहा कि पंजाब और हरियाणा, जहां बड़े पैमाने पर खेतों में पराली जलाई जा रही है, के इलाकों से बहने वाली उत्तर-पश्चिमी हवा दिल्ली में प्रदूषण के इस गंभीर स्तर के लिए जिम्मेदार है । संस्था ने कहा कि कम से कम एक दिन तक ऐसे ही हालात बने रहने की आशंका है ।
हवा की गुणवत्ता के आधार पर लोगों को परामर्श जारी करने वाले СसफरТ के मोबाइल ऐप में गुणवत्ता सूचकांक 473 दिखाया गया जो 500 से कुछ ही कम है । 500 इसकी अधिकतम सीमा होती है । विशेषज्ञों ने बताया कि तापमान में गिरावट और हवा नहीं के बराबर बहने के कारण भी स्थिति इतनी खराब हुई है ।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने पिछले साल कहा था कि दिल्ली में रहना गैस चैंबर में रहने की तरह है । अदालत ने केंद्र और दिल्ली सरकार को निर्देश दिया था कि वह प्रदूषण से मुकाबले की विस्तृत कार्य योजना पेश करे । सुबह के वक्त प्रदूषण का चरम स्तर (पीएम 2.5 और पीएम10) सुरक्षित सीमा से 10 गुना से भी ज्यादा दर्ज किया गया । दिन ढलने के साथ इसमें कमी दर्ज की गई, लेकिन शाम के बाद अचानक इसमें उछाल आ गया। इन सूक्ष्म कणों की सुरक्षित सीमा क्रमश: 60 और 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर है ।
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