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थलसेना प्रमुख की नियुक्ति पर राजनीतिक विवाद, सरकार ने अपने फैसले को उचित बताया

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नए थलसेना प्रमुख की नियुक्ति का मुद्दा रविवार को राजनीतिक विवादों में घिर गया और कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी पार्टियों ने दो अधिकारियों को नजरअंदाज किए जाने पर प्रधानमंत्री से सवाल किए तथा उनसे इस फैसले का उचित कारण बताने को कहा। विपक्ष के हमले के बीच सरकार ने ले. जनरल बिपिन रावत को थलसेना प्रमुख बनाए जाने के फैसले को उचित ठहराया और जोर दिया कि उनका अभियानगत अनुभव तथा सक्रियता उनके पक्ष में रही।
 
भाजपा ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि रक्षा बलों से जुड़े किसी मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने संस्थानों से छेड़छाड़ और सेना में राजनीति करने के लिए सरकार की निंदा की। सरकार ने शनिवार को दो वरिष्ठ अधिकारियों पूर्वी सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी और दक्षिणी सेना कमान प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल पीएम हारिज को नजरअंदाज करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत को नया थलसेना प्रमुख बनाया है।
 
भाकपा नेता डी राजा ने सरकार के कदम पर सवाल उठाया और कहा कि नियुक्ति चाहे सेना, न्यायपालिका या सीवीसी में हो या कार्यवाहक सीबीआई निदेशक और केन्द्रीय सूचना आयोग में नियुक्तियां हों, सभी विवादित हो गई हैं। जदयू नेता पवन वर्मा ने कहा, "हर सवाल जो किया जा रहा है वह मुद्दे के राजनीतिकण के लिये नहीं होता बल्कि किसी जवाब के स्पष्टीकरण के लिये होता है।" भाजपा ने इस नियुक्ति को लेकर सरकार पर निशाना साधने के लिए कांग्रेस की निंदा की और कहा कि रक्षा बलों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। पार्टी ने कहा कि वर्तमान सुरक्षा स्थितियों को ध्यान में रखते हुए लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत की पदोन्नति हुई।
 
भाजपा के राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा ने कहा कि नये सेना प्रमुख को पांच सबसे वरिष्ठ अधिकारियों के समूह में से चुना गया जो सभी सक्षम हैं और रावत की नियुक्ति को अन्य के खिलाफ नकारात्मक रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। विपक्षी पार्टी पर निशाना साधते हुए शर्मा ने कहा कि कांग्रेस द्वारा सेना प्रमुख की नियुक्ति का राजनीतिकरण करना उसकी हताशा को दिखाता है क्योंकि वह कई चुनावी हारों के बाद राष्ट्रीय राजनीति में हाशिये पर आ गई है।
 
रक्षा मंत्रालय सूत्रों ने जोर दिया कि थलसेना प्रमुख का चयन सरकार का विशेषाधिकार है और यह पूरी तरह से गुण पर आधारित है। मंत्रालय ने शीर्ष पद पर ले. जनरल रावत के चयन के लिए वजहों में जम्मू कश्मीर में 19वें डिविजन के कमांडिंग अधिकारी के रूप में उनके बेहतरीन रिकार्ड और रक्षा मंत्रालय तथा सेना मुख्यालय के कामकाज से उनके परिचय को बताया। मंत्रालय सूत्रों ने कहा कि सेना कमांडरों के रैंक के अधिकारियों के पैनल में सभी अधिकारी सक्षम हैं और सर्वाधिक योग्य का चयन किया गया है।
 
सूत्रों ने जोर दिया कि पैनल से सर्वाधिक योग्य का चयन करना सरकार का विशेषाधिकार होता है। उन्होंने कहा कि सरकार देश की सुरक्षा स्थिति और भविष्य के परिदृश्य के आधार पर सर्वाधिक योग्य अधिकार के चयन का अंतिम फैसला करती है। उन्होंने कहा कि मौजूदा माहौल में, आतंकवाद और उग्रवाद से मुकाबला अहम मुद्दे हैं।
 
तिवारी ने कहा कि ले. जनरल रावत जिन्हें थलसेनाध्यक्ष नियुक्त किया जा रहा है, के पास शायद सभी जरूरी योग्यताएं हों लेकिन तथ्य यह है कि पदानुक्रम के मामले में सजग इस संगठन में वरिष्ठता का सिद्धांत काफी पवित्र होता है। उन्होंने कहा कि तीन वरिष्ठ अधिकारियों, ले. जनरल प्रवीण बख्शी ले. पी एम हैरितज और शायद ले. जनरल बी एस नेगी की अनदेखी सांस्थानिक निष्ठा को लेकर बेहद गंभीर सवाल खड़े करती है। हालांकि वरिष्ठ सेना अधिकारियों ने कहा कि सिर्फ सबसे वरिष्ठ कमांडर ले. जनरल बख्शी और ले. जनरल हैरिज की वरीयता को नजरअंदाज कर ले. जनरल रावत की नियुक्ति की गयी है। 
 
तिवारी ने यहां पार्टी कार्यालय में संवाददाताओं से कहा कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वरीयता को नजरअंदाज कर इस नियुक्ति के लिए मजबूर करने वाले कारण बताने चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि वरिष्ठता के सिद्धांत का क्यों सम्मान नहीं किया गया। राजा ने कहा, सेना में नियुक्ति विवादित हो गई है, न्यायपालिका में नियुक्ति पहले ही विवादित है, सीवीसी, सीबीआई निदेशक और केन्द्रीय सूचना आयोग, इन सभी में शीर्ष स्तर पर नियुक्तियां बहुत विवादित हो रही हैं।


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