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संसद का शीतकालीन सत्र नोटबंदी की भेंट चढ़ गया अब इसके लिए कौन जिम्मेदार है ये तो पब्लिक देख ही रही है लेकिन बीजेडी सांसद जय पांडा ने अपनी सैलरी नहीं ली। लोकसभा की कार्यवाही नष्ट होने से दुखी सांसद जय पांडा ने अपनी तरफ से इसकी भरपाई करने की कोशिश की है।
पांडा ने बताया कि वो अपनी सैलरी का उतना हिस्सा और भत्ता लौटा देते हैं, जितना लोकसभा के समय का नुकसान हुआ है। ऐसा वो 4-5 सालों से कर रहे हैं। पांडा ने कहा कि वह ऐसा संसद का कामकाज बाधित होने के सांकेतिक विरोध के तौर पर करते हैं। हालांकि वह यह भी स्वीकार करते हैं कि जितनी बड़ी तादाद में संसद की कार्यवाही में लगने वाली रकम जाया हो रही है, उनकी लौटाई यह रकम उसके हिसाब से कुछ भी नहीं है। उन्होंने कहा, संसद में हंगामे के चलते देश बहुत बड़ी तादाद में अपनी रकम गंवाता जा रहा है।
मैं ऐसा इसलिए करता हूं क्योंकि मुझे मेरा जमीर धिक्कारता है। हमें जो काम करना है हम उसके लिए इतने लाभ लेते हैं लेकिन हम उसी काम को नहीं कर रहे हैं। पांडा ने जोर देकर कहा कि उन्होंने कभी भी संसद को बाधित नहीं किया है। मैंने पिछले कई सालों में ऐसा नहीं किया है। ऐसा मेरा व्यक्तिगत रूप से मानना है।
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